गाजियाबाद

लोनी में युवक को बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराने का आरोप

सूदखोरी और जबरन वसूली का भी मामला

पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर से मिलकर दोषियों के खिलाफ की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।

लोनी गाजियाबाद : लोनी बॉर्डर थाना क्षेत्र की गुलाब वाटिका पुलिस चौकी से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक युवक को कथित रूप से बंधक बनाकर जबरन मजदूरी कराने, मारपीट करने और घर में घुसकर जबरदस्ती अवैध वसूली करने का आरोप पीड़ित ने लगाया है। पीड़ित गुरमीत सिंह बेदी ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई है, साथ ही स्थानीय लोनी पुलिस पर साक्ष्य देने के बाद भी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न करने का आरोप भी लगाया है।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित ने करीब दो साल पहले 70 हजार रुपये 2 प्रतिशत मासिक ब्याज पर उधार लिए थे। आरोप है कि बाद में आरोपितों राजेश और उसके पति ब्रजपाल ने मनमाने तरीके से ब्याज दर बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दी और हर महीने लगभग 17 हजार रुपये वसूलने लगे। पीड़ित का कहना है कि आरोपित उसकी फैक्ट्री पर पहुंचकर तनख्वाह के दिन पूरी रकम जबरन ले जाते थे और समय पर भुगतान न होने पर 500 रुपये प्रतिदिन की पेनल्टी भी लगाते थे।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि अब तक उससे करीब 3.5 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं, इसके बावजूद और पैसे की मांग की जा रही है। साथ ही उसे और उसके परिवार को जान से मारने व बच्चों के अपहरण की धमकियां दी जा रही हैं। आरोप है कि आरोपित घर से गैस सिलेंडर, चेक और एटीएम कार्ड भी जबरदस्ती ले गए।
घटना 15 अप्रैल की बताई जा रही है, जब आरोपितों ने पीड़ित को हिसाब-किताब के बहाने अपने घर बुलाया, जहां उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद उसे जबरन बेहटा हाजीपुर रेलवे स्टेशन ले जाया गया और वहां से बड़ौत क्षेत्र में एक भट्टे पर ले जाकर तीन दिनों तक बंधक बनाकर मजदूरी कराई गई।
पीड़ित ने बताया कि उसने मौके का फायदा उठाकर भट्टे के मुनीम के फोन से अपने भाई को सूचना दी, जिसके बाद परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया। आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में पूछताछ तो की, लेकिन शिकायत के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपित लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन कर हमें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और पैसे के लिए दबाव बना रहे हैं। मामले में पीड़ित ने प्रशासन से एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आ सका है।

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