“गरीब बच्चों की शिक्षा का जिम्मा उठाने उतरी भानु ऑर्गेनिक संस्था, तारानगर में कार्यालय का हुआ उद्घाटन”
"Bhanu Organic Sanstha takes up the responsibility of educating poor children, office inaugurated in Taranagar"

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। गरीब और वंचित तबके के बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुँचाने के लिए भानु ऑर्गेनिक संस्था ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्था की तरफ से शनिवार को तारानगर पंचायत के वार्ड संख्या 14 में कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इस मौके पर ग्रामवासी, महिलाएं और समाजसेवी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि पूरा उद्घाटन समारोह एक उत्सव की तरह मनाया गया, मानो शिक्षा की ओर बढ़ता हर कदम किसी त्योहार से कम न हो।संस्था की प्रमुख और ब्लॉक शिक्षिका रेखा खातून ने कहा कि संस्था का उद्देश्य सिर्फ स्कूल खोलना या नामांकन बढ़ाना नहीं है, बल्कि बच्चों के भीतर सीखने की जिज्ञासा और आत्मविश्वास जगाना है। उन्होंने बताया कि संस्था अब तक डेढ़ सौ गरीब बच्चों के लिए विद्यालय खोल चुकी है, जहाँ बच्चों को न केवल मुफ्त में पढ़ाई कराई जा रही है, बल्कि किताबें, कॉपी और जरूरी शैक्षणिक सामग्री भी दी जा रही है।रेखा खातून ने भावुक अंदाज में कहा कि “जब हम किसी गरीब बच्चे के हाथ में किताब देखते हैं, उसकी आँखों में सपने चमकते हुए पाते हैं, तो लगता है कि हमारी मेहनत रंग ला रही है। हम चाहते हैं कि आने वाले समय में तारानगर पंचायत का कोई भी बच्चा अशिक्षित न रहे। इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए आज कार्यालय का उद्घाटन हुआ है। यह कार्यालय हमारी कार्ययोजना को और संगठित ढंग से लागू करने का केंद्र बनेगा।”इस अवसर पर पूर्व मुखिया प्रतिनिधि अफजल हुसैन ने संस्था की पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस पंचायत के लिए यह गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा – शिक्षा सबसे बड़ी पूंजी है। जब गरीब परिवार का बच्चा पढ़-लिखकर आगे बढ़ता है तो वह न सिर्फ अपना जीवन बदलता है, बल्कि पूरे समाज को नई दिशा देता है। भानु ऑर्गेनिक संस्था ने इस जिम्मेदारी को उठाकर सच में मिसाल पेश की है। पंचायत का हर व्यक्ति संस्था के साथ खड़ा है।”महिलाओं की भारी भागीदारी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया। वे उत्साहित नजर आईं और एक स्वर में कहा कि यह संस्था बच्चों की शिक्षा के लिए जो कर रही है, उसका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक जाएगा। एक महिला ने कहा कि पहले गाँव की बच्चियाँ पढ़ाई से वंचित रह जाती थी, लेकिन अब संस्था की पहल से बेटियाँ भी शिक्षा के रास्ते पर बढ़ रही हैं।ग्रामवासियों का मानना है कि यदि ऐसी संस्थाओं को प्रशासनिक स्तर पर सहयोग मिले तो न केवल पंचायत, बल्कि पूरा जिला शिक्षा के क्षेत्र में मिसाल बन सकता है। कार्यक्रम का समापन तालियों की गड़गड़ाहट और बच्चों की खिलखिलाहट के बीच हुआ। बच्चों की मासूम मुस्कान यह संकेत दे रही थी कि यह सिर्फ एक कार्यालय का उद्घाटन नहीं, बल्कि भविष्य की नई सुबह का आरंभ है।



