जालौन
बीडीओ की जांच में दोषी सचिव पर दो माह बाद भी नहीं हुई कार्यवाही
सचिव के सामने बौने पड़े जिम्मेदार, क्यों कतरा रहे जिले के अधिकारी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। विवादित सचिव सुरेशचंद्र निषाद इस समय खासा चर्चा में है। बवीना गांव की पंचायत सहायक के साथ अभ्रदता और षडयंत्र कर नोटिस देने पर पंचायत सहायक ने डीएम को संबोधित शिकायती पत्र सिटी मजिस्ट्रेट को दिया था। जिस पर कदौरा विकास खंड के जिम्मेदारों में हड़कंप मच गया था। सचिव की दबंगई के आगे अधिकारी भी उस पर कार्यवाही से कतराते नजर आ रहे हैं। जिस कारण सचिव के हौसले बुलंद है और वह अब बेखौफ होकर भ्रष्टाचार को अंजाम दे रहा है।
गौरतलब है कि 22 फरवरी 2026 को कदौरा ब्लाक की दो गौशालाओं ग्राम पंचायत बागी और उकुरवा के मजरा सजेहरा में संचालित गोशालाओं की शिकायत में मिलने पर डीएम राजेश कुमार पाण्डेय के निर्देश पर मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ मनोज कुमारअवस्थी ने निरीक्षण किया था। जांच के दौरान उनको गोशालाओं में अव्यवस्थाएं मिली थी। जिस पर उन्होंने मौके पर जिम्मेदारों को फटकार लगाकर अपनी रिपोर्ट 26 फरवरी को डीएम को सौंपी थी। जांच के आधार पर उकुरवा के मजरा सजेहरा और बागी के सचिवों और ग्राम प्रधानों को क्रमशः 26.5 रुपया प्रति गौवंश प्रति दिन और 23.5 रुपया प्रति गौवंश प्रतिदिन के हिसाब से एक महीने का वसूली का प्रावधान किया गया था। गौवंश के साथ अनाचार और खाने की सामग्री में लापरवाही करने वाले ग्राम पंचायत सचिव सुरेशचंद्र निषाद और अर्चना प्रजापति पर रिकवरी की संतुति की थी। जिसकी जांच रिपोर्ट बीडीओ संदीप मिश्रा ने डीपीआरओ को प्रेषित कर दी थी। दो माह बीत जाने के भी सचिवों और प्रधानों से रिकवरी नहीं की गई। जो चर्चा का विषय बना हुआ है।
कटमनी के फेर में फंसे जिम्मेदार नहीं करते कार्यवाही
विभागीय अधिकारियों का विवादित सचिवों से स्नेह जगजाहिर है। तभी जांच रिपोर्ट में दोषी जाने के बाद भी सुरेशचंद्र निषाद और ग्राम बागी गांव की सचिव अर्चना प्रजापति पर दो महीने होने के उपरांत कोई कार्यवाही नहीं की गई। कर्मचारियों की माने तो अधिकारी सचिवों से मोटा लिफाफा लेने के लिए ही कार्यवाही में देरी करते हैं और दोषी कर्मचारियों को सांठगांठ करने का पूरा समय देते हैं।



