पाकुड़

पाकुड़ में 4 माह से डीडीसी पद रिक्त, विकास कार्यों पर असर, सरकार और जनप्रतिनिधियों पर उठे सवाल

The DDC post in Pakur has been vacant for four months, impacting development work and raising questions about the government and public representatives.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़ में उप विकास आयुक्त (डीडीसी) का पद पिछले चार महीनों से रिक्त रहने का मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। 31 दिसंबर 2025 को तत्कालीन डीडीसी महेश कुमार संथालिया के सेवानिवृत्त होने के बाद अब तक नए अधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाई है, जिससे विकास कार्यों की गति पर सवाल उठने लगे हैं। महेश कुमार संथालिया की सेवानिवृत्ति के बाद जिले के तत्कालीन उपायुक्त मनीष कुमार ने अतिरिक्त प्रभार के रूप में डीडीसी का कार्यभार संभाले हुए थे (मगर उन्हें पश्चिमी सिंहभूम स्थानांतरित कर दिया गया), जो अब (डीडीसी का अतिरिक्त प्रभार) जिले के नवपदस्थापित डीसी मेघा भारद्वाज संभाला हुआ है। लेकिन प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्णकालिक डीडीसी की नियुक्ति आवश्यक होती है। जिले में चल रही विभिन्न योजनाओं की निगरानी और समन्वय के लिए यह पद बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि संथाल परगना की राजनीति में प्रभाव रखने वाले नेताओं, खासकर पंकज मिश्रा, की मौजूदगी के बावजूद इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, पाकुड़ जिले के तीनों विधायक भी राज्य की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का हिस्सा हैं, बावजूद इसके डीडीसी की नियुक्ति में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं और प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। वही आम लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि यदि समय पर पदस्थापना नहीं की गई, तो इसका असर विकास योजनाओं और स्थानीय प्रशासन की कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली झारखंड सरकार इस मुद्दे पर कब तक निर्णय लेती है और पाकुड़ को स्थायी डीडीसी कब मिलता है।

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