बाराबंकी

गाँव की वृक्षगणना पूर्ण कर जिला वन अधिकारी को अमित अवस्थी ने सौंपा ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बाराबंकी विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर ग्राम पंचायत मसौली के जंगली पशु पक्षियों हेतु मानव रहित 100 बीघे के वन क्षेत्र को सुरक्षित करने, 100 वर्ष से अधिक आयु के 19 वृक्षों के संरक्षण, गाँव की नालियों का गंदा जल बिना शोधित किए कल्याणी नदी में प्रवाहित होने पर रोक लगाने एवं गाँव के निवासी 16 राष्ट्रीय पक्षी मोर के संरक्षण आदि मांगों को लेकर अमित अवस्थी ‘अधिवक्ता’ संयोजक धर्मजागरण बाराबंकीधाम उ.प्र.ने अपने सहयोगियों युगल दीक्षित, सुरेश चंद्र गौतम, इंद्रजीत सिंह, नरेंद्र त्रिपाठी, योगेंद्र सिंह आदि के साथ जिला वन अधिकारी आकाशदीप बधावन को ज्ञापन सौंपा।
इस अवसर पर संयोजक अमित अवस्थी ने बताया कि ‘नगरों से गाँव का पर्यावरण स्वच्छ होता है’ इस सिद्धांत को वर्तमान में सत्यता की कसौटी पर कसने हेतु अपने ही गाँव की स्पष्ट भौगोलिक सीमा निर्धारित कर उन्होंने पिछले वर्ष अपने गाँव को 14 भागों में बाँटकर 5 वर्ष से अधिक आयु के वृक्षों की गणना उनकी प्रजाति एवं उनके लैंडमार्क की पहचान कर की थी। जब सभी खेती की फसलें कीटनाशकों के प्रयोग से तैयार की जा रही हैं तो वृक्ष ही स्वच्छ पर्यावरण के लिए आशा की किरण हैं, गाँव का पर्यावरण वृक्षों और मानव आबादी के अनुपात, यूकेलिप्टस और जंगली बबूल जैसे आतंकवादी वृक्षों की संख्या, वर्ष में कुल आवश्यकता के सापेक्ष वर्षा जल संचय आदि पर निर्भर होता है। ग्राम मसौली के पर्यावरण के संबंध में देश के गांवों के लिए उदाहरणस्वरुप  इस प्रकार की एक रिपोर्ट तैयार की गई है जिसमें गाँव के 5 वर्ष से अधिक आयु के सभी 21061 वृक्षों की गणना धर्मसेवकों के सहयोग से की गई। इस गाँव में 5 वर्ष से अधिक आयु के वृक्षों की कुल 102 प्रकार की वनस्पति पाई गई जिसमें 5 प्रकार की प्रजाति की जानकारी नहीं हो पाई। गाँव में आतंकवादी वृक्ष यूकेलिप्टस 7034 और जंगली बबूल 93 पाए गए अर्थात् मानव समाज के लिए कल्याणकारी वृक्षों की संख्या मात्र 13934 पाई गई जबकि गाँव की आबादी 25000 से अधिक है।  वर्तमान राज्य के शासनकाल के 8557 वृक्ष पाए गए।
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