मेरठ
‘धरती आकाश’ कार्यशाला में प्रतिभागियों ने जाना ब्रह्मांड का विज्ञान
सीखी एस्ट्रोफोटोग्राफी की तकनीक
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मेरठ। प्रगति विज्ञान संस्था एवं जिला विज्ञान क्लब के संयुक्त तत्वावधान में विज्ञान घर, बिजली बंबा बाईपास पर आयोजित दो दिवसीय विशेष कार्यशाला “धरती आकाश” के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों ने विज्ञान, खगोल विज्ञान और प्रकृति को करीब से समझने का अवसर प्राप्त किया। कार्यशाला में ब्रह्मांड की संरचना, खगोलीय घटनाओं तथा टेलीस्कोप के माध्यम से फोटोग्राफी की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।
कार्यशाला का संचालन शैलिनी पाल ने किया। प्रथम सत्र की शुरुआत प्रातःकालीन सूर्योदय के अवलोकन से हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने सूर्योदय फोटोग्राफी के साथ योग गतिविधियों में भी भाग लिया। इसके बाद आयोजित शैक्षणिक सत्र में विशेषज्ञों ने ब्रह्मांड की संरचना, ग्रहों, तारों और विभिन्न खगोलीय घटनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वक्ताओं ने कहा कि ब्रह्मांड को समझने के लिए केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्यक्ष अवलोकन भी अत्यंत आवश्यक है।
कार्यशाला में उत्कर्ष, सतबीर नागल, डॉ. पवन और डॉ. कृष्ण वत्स ने प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए खगोल विज्ञान से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। सायंकालीन सत्र में प्रतिभागियों ने टेलीस्कोप के माध्यम से आकाशीय पिंडों का अवलोकन किया और ब्रह्मांड से जुड़े अनेक रोचक तथ्यों को जाना।
टेलीस्कोप से फोटोग्राफी का दिया गया व्यावहारिक प्रशिक्षण
कार्यशाला का प्रमुख आकर्षण दीपक शर्मा द्वारा दिया गया एस्ट्रोफोटोग्राफी (खगोलीय फोटोग्राफी) का विशेष प्रशिक्षण रहा। उन्होंने प्रतिभागियों को बताया कि टेलीस्कोप की सहायता से मोबाइल फोन और डीएसएलआर कैमरे के माध्यम से चंद्रमा एवं सूर्य की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें कैसे ली जा सकती हैं।
प्रशिक्षण के दौरान मोबाइल कैमरे को टेलीस्कोप के आईपीस के सामने सही तरीके से स्थापित करने, फोकस और एक्सपोजर नियंत्रित करने तथा चंद्र सतह के गड्ढों और संरचनाओं को स्पष्ट रूप से कैद करने की तकनीक समझाई गई। साथ ही डीएसएलआर कैमरे को विशेष एडेप्टर के माध्यम से टेलीस्कोप से जोड़कर बेहतर खगोलीय चित्र प्राप्त करने का प्रदर्शन भी किया गया।
सूर्य की फोटोग्राफी के संबंध में दीपक शर्मा ने सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए कहा कि बिना प्रमाणित सोलर फिल्टर के कभी भी सूर्य का अवलोकन या फोटोग्राफी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने सोलर फिल्टर के सुरक्षित उपयोग, कैमरे की उपयुक्त सेटिंग, सनस्पॉट्स को रिकॉर्ड करने की तकनीक तथा फोकस, एक्सपोजर और कैमरा स्थिरता जैसी महत्वपूर्ण बारीकियों की जानकारी दी।
आयोजकों ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना, खगोल विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना तथा आधुनिक तकनीकों के माध्यम से ब्रह्मांड को समझने के अवसर उपलब्ध कराना है।



