
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर एवं स्वयं को “सनातनी मुसलमान” बताने वाली नाजिया इलाही खान द्वारा कथित रूप से पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) और उम्मुल मोमिनीन हजरत आयशा सिद्दीका (रज़ियल्लाहु अन्हा) के संबंध में पिछले दिनों की गई आपत्तिजनक टिप्पणी वाले मामले में अब तक नाजिया इलाही पर कोई वैधानिक कार्यवाही कर उसे गिरफ्तार नही किया गया है।जिससे मुस्लिम समाज मे आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।जहा बार बार आवेदन निवेदन और ज्ञापन पर भी बात ना बनने और नाजिया पर कोई कार्यवाही ना होने की नाराजगी, शुक्रवार को मुस्लिम समाज मे साफ देखी गई।जिन्होंने इस मामले में अपना आक्रोश जताते हुए, नगर के अंबेडकर चौक में एकत्र होकर जमकर नारेबाजी की, तो वही घटना पर अपना आक्रोश जताते हुए एआईएमआईएम (एमआईएम) के बैनर तले नाजिया इलाही का पुतला दहन किया। इस दौरान पार्टी पदाधिकारियों के साथ साथ समाजिक बन्धुओ ने भी नाजिया इलाही के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर, मामले में वैधानिक कार्यवाही किए जाने और उसे सिर्फ औऱ सिर्फ फाँसी की सजा दिए जाने की मांग की। तो वही सीएसपी को मौके पर सौपे गए ज्ञापन में उन्होंने केंद्र सरकार से संसद में नफरती बयानों के खिलाफ नया कानून बनाए जाने की भी गुहार लगाई है।जिसमे उन्होंने किसी भी धर्म समुदाय जाती की धार्मिक भावना आहत करने वालो को सीधे फांसी की सजा दिए जाने की मांग की है।
नाजिया इलाई को दी जाए सजाए मौत
नाजिया इलाही के बयान को लेकर शुक्रवार को बालाघाट में मुस्लिम समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। एमआईएम के बैनर तले बड़ी संख्या में समाजजन एकत्र हुए और आम्बेडकर चौक पर नाजिया इलाही का पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद सीएसपी को पुलिस अधीक्षक के नाम ज्ञापन सौंपते हुए नाजिया के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि किसी भी धर्म, महापुरुष या धार्मिक आस्था के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी समाज में वैमनस्य और अशांति फैलाने का कार्य करती है। ऐसे मामलों में केवल सामान्य कानूनी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है,उन्होंने सरकार से गुहार लगाते हुए संसद में ऐसे बयानों पर कठोर कानून बनाने की मांग की, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी धर्म के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने का साहस न कर सके। प्रदर्शन के दौरान नफरत फैलाने वाले बयानों पर कठोरतम दंड खास तौर पर फाँसी की सजा दिए जाने की मांग की गई।
देशभर में विरोध, बालाघाट में भी गूंजा आक्रोश
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि नाजिया इलाही खान के कथित बयान से करोड़ों मुस्लिमों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में इस मामले को लेकर विरोध प्रदर्शन, ज्ञापन और एफआईआर की मांग की जा रही है। बालाघाट में भी मुस्लिम समाज ने इस बयान को सामाजिक सौहार्द के लिए गंभीर खतरा बताते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की।प्रदर्शन के दौरान पार्टी पदाधिकारियों व समाजजनों ने नाजिया इलाही के विरुद्ध जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से शीघ्र एवं निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि कानून सभी धर्मों के सम्मान की समान रूप से रक्षा करे, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पहले भी दे चुकी हैं विवादित बयान
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह पहला अवसर नहीं है जब नाजिया इलाही खान ने किसी विशेष समुदाय को लेकर विवादित बयान दिया हो। आरोप लगाया गया कि पूर्व में भी उनके बयानों से सामाजिक और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति बनी है।उन्होंने बताया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार असीमित नहीं है और यदि कोई व्यक्ति धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है या समाज में नफरत फैलाने का प्रयास करता है तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई होना आवश्यक है।
लोक व्यवस्था और सामाजिक सद्भाव के लिए बताया गंभीर विषय
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नाजिया इलाही खान एवं दिव्या सिंह द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, यूट्यूब चैनलों और पॉडकास्ट के माध्यम से इस्लाम, कुरआन शरीफ, पैगंबर-ए-इस्लाम, हजरत आयशा सिद्दीका तथा मुस्लिम समाज के संबंध में कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की गई है। ऐसी सामग्री धार्मिक भावनाओं को आहत करने के साथ-साथ विभिन्न समुदायों के बीच घृणा एवं वैमनस्य पैदा कर सार्वजनिक शांति और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकती है।
इन प्रमुख मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए, विवादित वीडियो, ऑडियो, पोस्ट और अन्य डिजिटल सामग्री की फॉरेंसिक जांच कराई जाए तथा यदि आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाते हैं तो भारतीय न्याय संहिता, 299,196,197,353 बीएनएस, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम एवं रासुका सहित अन्य लागू कानूनी प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। साथ ही संबंधित सोशल मीडिया खातों की जांच साइबर सेल से कराने, कानून का उल्लंघन करने वाली सामग्री हटाने तथा सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने की भी मांग की गई।
रासुका लगाकर नाजिया को किया जाए गिरफ्तार,दी जाए फांसी- लियाकत अली
नाजिया खान के बयान को लेकर एमआईएम जिलाध्यक्ष सैयद लियाकत अली ने बताया कि नाजिया ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद साहब की शान के खिलाफ जो बयानबाजी की है, उससे मुस्लिम समाज, अपनी धार्मिक भावनाओं पर हमला मानते हुए इसके विरोध में खड़ा है। हमारी मांग है कि शासन-प्रशासन, नाजिया रासुका के तहत अपराध दर्ज कर उसे गिरफ्तार करें। उन्होंने बताया कि नाजिया खान अपने बयानों में हमेशा ही मुसलमान और इस्लाम के प्रति जहर उगलते आ रही है। मगर अब बात इस्लाम के आखिरी पैगंबर मोहम्मद साहब और अम्मा हजरत हजरत आयशा सिद्दीका के बारे में जो अपमानजनक और शर्मनाक बयान दिया है। उसको कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान दो समुदाय को आपस में लड़ाने की कोशिश है। जिस पर अपराध दर्ज कर तत्काल उसकी गिरफ्तारी की जाए।उन्होंने बताया कि नाजिया खान के बयान से समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई है। इस्लाम ही नहीं दुनिया के किसी भी मजहब के बारे में गलत बयानी करके देश की अमन, शांति और भाईचारे को खत्म करने का जो षडयंत्र किया जा रहा है, उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में बालाघाट में एफआईआर दर्ज कर नक्सली मुक्त अभियान की तरह ही बालाघाट पुलिस से निवेदन करते हुए कहा कि पुलिस जाए और रासुका के तहत नाजिया को गिरफ्तार करके लेकर आए,उस पर वैधानिक कार्यवाही कर,उसे सिर्फ और सिर्फ फांसी की सजा दी जाए।



