
तमिलनाडु। डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने तमिलनाडु में इखढ सरकार पर पूर्व मंत्री अनीता राधाकृष्णन की मानहानि मामले में गिरफ्तारी को लेकर कड़ा हमला बोला है। स्टालिन ने सरकार पर विपक्ष को निशाना बनाने के लिए पुलिस का दुरुपयोग करने और गंभीर अपराधों के मामलों में निष्क्रियता बरतने का आरोप लगाते हुए ‘पुलिस राज’ का दावा किया। यह गिरफ्तारी मद्रास हाई कोर्ट द्वारा राधाकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद हुई, जिससे तमिलनाडु में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने तमिलनाडु में ळश्ङ के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना की है। उन्होंने पूर्व मंत्री अनीता आर. राधाकृष्णन की गिरफ्तारी को लेकर सरकार पर आरोप लगाया कि वह ज्यादा गंभीर मुद्दों को नजरअंदाज करके विपक्ष के नेताओं को निशाना बनाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही है। स्टालिन ने यह बात 31 जनवरी, 2026 को कही। राधाकृष्णन को ऊटङ की एक जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के बारे में की गई टिप्पणियों से जुड़े मानहानि के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
पर एक पोस्ट में, स्टालिन ने गिरफ्तारी की जल्दबाजी पर सवाल उठाया और कहा कि राधाकृष्णन को तब हिरासत में लिया गया जब वे अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘टेक डायवर्जन’ सरकार ने पूर्व मंत्री अनीता राधाकृष्णन को इस आरोप में गिरफ्तार किया है कि उन्होंने निरीक्षण कार्य के दौरान मुख्यमंत्री की बदनामी की। जो व्यक्ति जनसेवा में लगा हो और अपने निर्वाचन क्षेत्र में कार्यों का निरीक्षण कर रहा हो, उसे गिरफ्तार करने की क्या जल्दबाजी थी?
स्टालिन ने मुख्यमंत्री पर फिल्मी एक्शन स्टाइल में पुलिस राज चलाने का आरोप लगाया और सरकार के चुनिंदा रवैये की आलोचना की। उन्होंने राधाकृष्णन के खिलाफ की गई तेज कार्रवाई की तुलना श्रीवैकुंटम के पर गैंगरेप का आरोप लगाने वाली महिला की शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने से की। स्टालिन ने पूछा, ” ‘प्योर पावर’ प्रशासन—जिसने श्रीवैकुंटम के ळश्ङ विधायक के खिलाफ गैंगरेप पीड़िता की शिकायत पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है—उस मामले में वैसी तेजी दिखाने में क्यों नाकाम रहा? क्या यह उस सरकार का बदलाव है जो पूरे तमिलनाडु में हत्याओं, डकैतियों और महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों को रोकने में नाकाम रही है, लेकिन दूसरी पार्टियों के विधायकों को अपनी पार्टी में शामिल करने में व्यस्त है?
इससे पहले, 31 जनवरी 2026 को मद्रास हाई कोर्ट ने मानहानि के मामले में राधाकृष्णन की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे उनकी गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया। जस्टिस जीके इलंथिरायण ने याचिका खारिज करते हुए 1967 से तमिलनाडु में फिल्म इंडस्ट्री के नेताओं के शासन के इतिहास का जिÞक्र किया और कथित मानहानि वाले बयानों की प्रकृति पर सवाल उठाए। पुलिस ने बताया कि राधाकृष्णन तिरुचेंदूर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत अथूर टाउन पंचायत में विकास कार्यों का निरीक्षण कर रहे थे, तभी परिसर से निकलते समय उन्हें हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के लिए उन्हें पुलिस अधीक्षक के कार्यालय ले जाया गया।



