मथुरा
मंत्री लक्ष्मी नारायण की मुश्किलें बढ़ा रहे सपा-कांग्रेस के नेता
चीनी मिल आंदोलन को मिला विरोधियों का साथ

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
मथुरा। छाता चीनी मिल दोबारा शुरू कराने के लिए चल रहे धरने को गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण के विरोधियों और हवा दे दी है। धरने में अब वह लोग भी अधिक शामिल हो रहे हैं, जो या तो दूसरे दलों का या फिर कहीं न कहीं चौधरी लक्ष्मी नारायण के विरोधी हैं। धरने में महिलाओं की संख्या भी पहले की अपेक्षा बढ़ रही है। 13 अगस्त से शुरू हुआ चीनी मिल आंदोलन अब बड़ा रूप लेता जा रहा है। सरकार ने 15 दिन पहले कैबिनेट से चीनी मिल में लगने वाले एथेनॉल प्लांट को मंजरी दे दी। पहले एथेनाल प्लांट लगेगा, उसके बाद विस्तार में चीनी मिल लगेगी। इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो वर्ष लगेंगे। लेकिन धरना दे रहे लोगों का कहना है कि उन्हें एथेनॉल प्लांट नहीं, चीनी मिल चाहिए। इसे लेकर 21 सितंबर की रात पुलिस ने जबरन धरना दे रहे लोगों को वहां से हटा दिए। धरनास्थल से गन्ना विकास मंत्री और वाल्मीकि समाज पर अमर्यादित टिप्पणी करने पर चार नामजद और 150 अज्ञात के विरुद्ध रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई। लेकिन अगले ही दिन से फिर ग्रामीण धरनास्थल पर पहुंच गए। धरने देने वालों की संख्या पहले से बढ़ गई है। सपा, कांग्रेस के नेता भी इस धरने में पहुंच रहे हैं। वहीं गन्ना विकास एवं चीनी मिल मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण इसी क्षेत्र से विधायक हैं, उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों का भी संरक्षण आंदोलन को मिलने लगा है। यही कारण प्रतिद्वंद्वियों के समर्थक भी बड़ी संख्या में धरने में शामिल हो रहे हैं। धरने में महिलाओं की संख्या भी बढ़ गई है। शनिवार को धरना शुरू हुए 44 दिन हो गए। अगुवाई कर रहे सेना के पूर्व सूबेदार ललित कर्मयोगी कहते हैं कि हमें चीनी मिल चाहिए, एथेनॉल प्लांट की हमें कोई जरूरत नहीं है।



