असम ने मनाया 72वां वाइल्डलाइफ वीक
राज्य ने जारी की पहली GPS‑आधारित हाथी अध्ययन रिपोर्ट, 287 संरक्षण कर्मियों का सम्मान।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : पर्यावरण, वनों और जलवायु परिवर्तन विभाग, असम ने 6 अक्टूबर को श्री श्री दामोदरदेव इंटरनेशनल ऑडिटोरियम, श्रीमन्त शंकरदेव कलाक्षेत्र पथ, पंजाबारी, गुवाहाटी में 72वां वाइल्डलाइफ वीक मनाने के लिए औपचारिक कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता असम सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन; वित्त; तथा खनन एवं खनिज विभाग के मंत्री जयंत मल्लबरूआ ने की। प्रमुख अतिथि के रूप में सन्दीप कुमार, IFS, प्रिंसिपल चीफ कंज़र्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स, असम उपस्थित थे। कार्यक्रम में डॉ. सत्येंद्र सिंह, IFS (एपीसीसीएफ और सीईओ, CAMPA), ह्रिदेश मिश्रा, आईएफएस एपीसीसीएफ (सोशल फॉरेस्ट्री), वरिष्ठ विभागीय अधिकारी, सेवानिवृत्त वन अधिकारी, प्रमुख वन्यजीव एनजीओ प्रतिनिधि, जेएफएमसी व ईडीसी सदस्य, विद्यालयीन छात्र-छात्राएँ और फ्रंटलाइन फील्ड स्टाफ भी उपस्थित रहे। स्वागत संबोधन डॉ. विनय गुप्ता, IFS, प्रिंसिपल चीफ कंज़र्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (वाइल्डलाइफ) एवं चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन, असम ने दिया और वाइल्डलाइफ वीक की महत्ता व समुदायों के साथ समन्वित संरक्षण की ज़िम्मेदारी पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान दो तकनीकी रिपोर्टें जारी की गईं। पहली रिपोर्ट “Tracking the Giants: Movement and Habitat‑Use Patterns of GPS‑Collared Elephants in Assam” असम की पहली GPS‑आधारित हाथी आंदोलन अध्ययन रिपोर्ट है, जिसे असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने WWF‑India के तकनीकी सहयोग से 2021–2026 के दौरान तैयार किया। यह अध्ययन हाथियों के आवागमन व आवास उपयोग के महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रदान करता है जो मानव‑हाथी संघर्ष कम करने व संरक्षण रणनीतियों को बेहतर बनाने में सहायक होंगे। दूसरी रिपोर्ट “Safeguarding Wildlife Movement: Mitigation Measures on National Highway 27 Traversing through the Dhansiri–Lungding Elephant Reserve, Assam” असम फॉरेस्ट डिपार्टमेंट, नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और WWF‑India के सहयोग से तैयार की गई है, जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग‑27 के उन्नयन के बाद पारिस्थितिक सुरक्षा और सुरक्षित वन्यजीव पारगमन सुनिश्चित करने के लिए अपनाए गए डिज़ाइन और क्रियान्वित निवारक उपायों का विवरण है। CAMPA असम, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, असम स्टेट ज़ू कम बोटैनिकल गार्डन और Help Earth के संयुक्त प्रयास से निर्मित जागरूकता फ़िल्म “Holy Turtles: A Story of Turtles in the Temple Ponds of Assam” का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट सेवा देने वाले फ्रंटलाइन कर्मियों के सम्मान समारोह थे। कुल 287 पुरस्कार पाँच श्रेणियों—प्रोटेक्शन, हैबिटैट मैनेजमेंट, कम्युनिटी एंगेजमेंट, वाइल्डलाइफ मॉनिटरिंग और ह्यूमन‑वाइल्डलाइफ कन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट—में प्रदान किए गए। इनमें वाइल्डलाइफ, टेरिटोरियल और रिसर्च व एजुकेशन वन विभागों के कर्मचारी, पुलिस बल और AFPF के सदस्य सम्मिलित थे। पुरस्कार प्राप्त करने वालों को उनके साईटेशन पढ़कर मंच पर बुलाकर सम्मानित किया गया। वाइल्डलाइफ वीक के उपलक्ष्य में असम स्टेट ज़ू द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के विजेताओं को भी पुरस्कार, मेडल और प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।मुख्य भाषण में जयंत मल्लबरूआ ने वन विभाग के कर्मियों की मेहनत और अनुशासन की सराहना की और कहा कि सकारात्मक और सतत प्रयास विभाग की संरक्षण उपलब्धियों को और उजागर करेंगे। कार्यक्रम का समापन विभाग के एक वरिष्ठ वन्यजीव अधिकारी द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।



