सिंगरौली

भुगतान के बदले 50 हजार रुपये मांगने का आरोप

आजीविका मिशन कार्यालय में जमीन पर बैठीं समूह की महिलाएं

लक्ष्मी स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष सुनीता विश्वकर्मा ने डीपीएम मंगलेश्वर सिंह पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

सिंगरौली। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से संचालित आजीविका मिशन की कार्यप्रणाली पर देवसर में सवाल खड़े हो गए हैं। आजीविका मिशन कार्यालय में समूह की महिलाओं के जमीन पर बैठने की तस्वीर सामने आने के बाद कार्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच लक्ष्मी स्व-सहायता समूह, खैराबड़ा की अध्यक्ष सुनीता विश्वकर्मा ने समूह के भुगतान के बदले 50 हजार रुपये मांगने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक (डीपीएम) मंगलेश्वर सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

सुनीता विश्वकर्मा के अनुसार, समूह के भुगतान की प्रक्रिया के दौरान उनसे कथित तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की गई। सुनीता भाजपा मंडल उपाध्यक्ष, नौढ़िया भी हैं। उनके आरोपों के बाद भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता और समूहों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, रिश्वत मांगने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है।

कार्यालय की व्यवस्थाओं पर भी सवाल

महिला स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए शासन की ओर से विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। ऐसे में आजीविका मिशन कार्यालय में महिलाओं के जमीन पर बैठने की तस्वीर ने बुनियादी सुविधाओं और कार्यालयीन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। समूहों से जुड़ी महिलाओं को योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ कार्यालय में सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना भी आवश्यक है।

निष्पक्ष जांच से सामने आएगी सच्चाई

मामले में जिला प्रशासन और आजीविका मिशन के वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच के दौरान समूह के भुगतान से जुड़े दस्तावेजों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयान के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। साथ ही, कार्यालय में महिलाओं के बैठने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी समीक्षा की जानी चाहिए।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है। यदि जांच में रिश्वत मांगने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि स्व-सहायता समूहों का सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर भरोसा बना रहे।

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