असम

असम सरकार ने वन विभाग की आय बढ़ाने के लिए नीतिगत सुधार और ऑनलाइन यादृच्छिक तबादला पोर्टल किए लॉन्च । 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि असम सरकार वन विभाग की वार्षिक आय को बढ़ाने के लिए नीतियों और नियमों में संशोधन कर रही है। उन्होंने यह बात शुक्रवार को वन विभाग के नए ऑनलाइन यादृच्छिक (रैंडमाइज़्ड) ट्रांसफर पोर्टल के उद्घाटन के दौरान कही। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में वन विभाग की कुल आय लगभग रु 700 करोड़ पर स्थिर रही है, जिसमें वनों की रॉयल्टी और अन्य वन राजस्व शामिल हैं, और इस ठहराव को तोड़ने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अवैध खनन पर अंकुश लगाने और निर्माण सामग्री की मांग को पूरा करने के लिए रेगुलर—कानूनी—रेत और पत्थर के स्रोतों का विस्तार आवश्यक बताया। “जब हम कानूनी खदानें बढ़ा देंगे तो अवैध गतिविधियाँ अपने आप घटेंगी। कानूनी चैनल से सरकार को रॉयल्टी भी मिलेगी और कई बेरोज़गार युवाओं को रोज़गार भी मिलेगा,” उन्होंने कहा। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले वर्षों में कानूनी स्रोत पर्याप्त नहीं बनाए जा सके, जो राजस्व ठहराव का एक कारण रहा है, और अब इस कमी को दूर करना आवश्यक है। नए पोर्टल के माध्यम से वन विभाग के 2,137 अधिकारियों व कर्मचारियों के तबादलों की प्रक्रिया को शामिल किया गया है। यह व्यवस्था छह श्रेणियों के पदों—डिप्टी रेंजर, फॉरेस्टर ग्रेड I, फ़ॉरेस्ट गार्ड, फिक्स्ड-पे कार्यकर्ता और गेम वॉचर—पर लागू होगी। पोर्टल वन्यजीव , क्षेत्रीय और सामाजिक वन विंग के कर्मचारियों का कवरेज करता है। 58 वर्ष से ऊपर की आयु वाले कर्मचारी तथा जिनके परिवार में गंभीर बीमारियाँ हैं या स्वास्थ्य जटिलताएँ हैं, उन्हें इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि विभाग में कुल लगभग 4,500 कर्मचारी हैं, पर वर्तमान अभ्यास में केवल वे 2,137 ही शामिल किए गए क्योंकि बाकी कर्मचारियों ने अभी तक तीन वर्ष की अनिवार्य अवधि पूरी नहीं की है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली उन कर्मचारियों को अवसर देगी जो लंबे समय से एक ही स्थान पर थे और अब नई जगह पर जाने का मौका मिलेगा। मुख्यमंत्री ने भर्ती और कर्मचारियों के प्रबंधन में पारदर्शिता को प्राथमिकता बताया और स्वागता-सतीर्थ पोर्टल का उल्लेख किया, जिसके माध्यम से पिछले दो वर्षों में हजारों सरकारी कर्मचारियों के पारस्परिक तबादले किए गए हैं। वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि गैंडे के शिकार के मामले घटे हैं, परंतु काजीरंगा नेशनल पार्क सहित प्रदेश में अन्य पशु-पक्षियों के शिकार पर सतत निगरानी आवश्यक है। उन्होंने वन्यजीव अपराध को पूरी तरह समाप्त करने के प्रयास जारी रखने पर ज़ोर दिया।

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