पीएनबी जलालाबाद में कथित गबन मामले में 100 ग्राहकों को राहत की उम्मीद
46 लाख रुपये लौटाने की तैयारी, करीब 300 ग्राहकों ने की थी करोड़ों रुपये की गड़बड़ी की शिकायत
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जलालाबाद, शामली। पंजाब नेशनल बैंक की जलालाबाद शाखा में बैंक मित्र अंकुर सैनी के माध्यम से हुए करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। लंबे समय से अपनी जमा पूंजी वापस मिलने का इंतजार कर रहे ग्राहकों में से करीब 100 लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। बैंक की ओर से इन ग्राहकों की लगभग 46 लाख रुपये की धनराशि लौटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, बैंक मित्र के माध्यम से लेनदेन करने वाले करीब 300 ग्राहकों ने बैंक में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि उनके खातों और पासबुक में दर्ज रकम के लेनदेन में अनियमितता हुई है। ग्राहकों का कहना था कि उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई बैंक मित्र के जरिए जमा कराई थी, लेकिन खाते में दर्ज धनराशि के बावजूद उन्हें रकम नहीं मिल सकी। इसके बाद पीड़ितों ने बैंक अधिकारियों से लगातार अपनी रकम वापस दिलाने की मांग की।
मामले की जांच के लिए बैंक स्तर पर ग्राहकों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की पड़ताल की गई। पीएनबी के सर्किल अधिकारी आरएल दास के मुताबिक, जांच के दौरान पिछले छह माह के सीसीटीवी फुटेज और संबंधित लोगों के बयानों का मिलान किया गया। इसके आधार पर बैंक परिसर में हुए लेनदेन की पुष्टि करने का प्रयास किया गया।
आरएल दास के अनुसार, जांच में करीब 100 ग्राहकों के दावे सही पाए गए हैं। इनकी लगभग 46 लाख रुपये की धनराशि संबंधित खातों में डाल दी गई है। दस्तावेजों और लेनदेन का अंतिम सत्यापन पूरा होने के बाद ग्राहकों को भुगतान जारी किया जाएगा।
बाकी ग्राहकों को अब भी रकम वापसी का इंतजार
इस फैसले से उन ग्राहकों को निराशा हुई है, जिनकी शिकायतें जांच में स्वीकार नहीं की गईं। बैंक अधिकारियों का कहना है कि जिन मामलों में बैंक परिसर के अंदर लेनदेन होने के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, उन्हें फिलहाल भुगतान के दायरे में शामिल नहीं किया गया है। बैंक परिसर से बाहर हुए लेनदेन की जिम्मेदारी लेने से भी बैंक ने इनकार किया है।
करीब 300 शिकायतकर्ताओं में से केवल 100 ग्राहकों के दावे स्वीकार होने के बाद बाकी पीड़ितों के सामने अपनी रकम वापस पाने की चुनौती बनी हुई है। ग्राहकों की मांग है कि उनकी शिकायतों की भी निष्पक्ष जांच कर जमा पूंजी वापस दिलाने का रास्ता निकाला जाए। फिलहाल, 46 लाख रुपये की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने को इस मामले में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
