ललितपुर

विश्व गौरैया दिवस विशेष

तुवन मंदिर में गूँजी गौरैया की चहचहाहट, पंचतत्वों के प्रतीक के रूप में लगे कृत्रिम गौरैया आवास

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। विश्व गौरैया दिवस के अवसर पर आज श्रीश्री 1008 तुवन मंदिर प्रांगण में एक अनूठा दृश्य देखने को मिला। मानव ऑर्गेनाइजेशन, स्टूडेंट फॉर डेवलपमेंट (एसएफडी) कानपुर प्रांत और भारतीय जैव विविधता संरक्षण संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में गौरैया बचाओ अभियान का भव्य शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात इसकी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक प्रस्तुति रही। श्रीहनुमानजी महाराज, जिन्हें पर्यावरण और अष्ट सिद्धियों का देवता माना जाता है, उनके सानिध्य में पांच कृत्रिम गौरैया आवास (घोंसले) स्थापित किए गए। ये पांच घोंसले प्रकृति के पंचतत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश का प्रतिनिधित्व करते हैं। कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चे गौरैया के मास्क पहनकर आकर्षण का केन्द्र बने रहे, जिन्होंने अपनी मासूमियत से विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाने का संदेश दिया। पर्यावरणविद् पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि गौरैया केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे ईको-सिस्टम की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। हमने तुवन मंदिर से इस अभियान की शुरुआत इसलिए की क्योंकि मंदिर परिसर जैव विविधता के संरक्षण के केन्द्र रहे हैं। पंचतत्वों के प्रतीक यह पांच आवास इस बात की याद दिलाएंगे कि मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति के बिना संभव नहीं है। हमारी आगामी योजना जनपद के हर स्कूल और मंदिर में इसी प्रकार गौरैया आवास लगाने की है। अभाविप संगठन मंत्री हरिओम जायसवाल ने कहा कि विद्यार्थी परिषद हमेशा से रचनात्मक कार्यों में अग्रणी रही है। एसएफडी के माध्यम से हम छात्रों को किताबी ज्ञान से बाहर निकालकर धरातल पर पर्यावरण संरक्षण से जोड़ रहे हैं। आज के बच्चे जब गौरैया का मास्क पहनकर इस अभियान का हिस्सा बनते हैं, तो वे भविष्य के लिए प्रकृति के रक्षक के रूप में तैयार होते हैं। यह अभियान पूरे कानपुर प्रांत के लिए एक मिसाल बनेगा। पर्यावरणविद् डा. राजीव निरंजन ने कहा कि बढ़ते शहरीकरण और कंक्रीट के जंगलों के बीच गौरैया ने अपना प्राकृतिक आवास खो दिया है। कृत्रिम आवास एक तात्कालिक और प्रभावी समाधान है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, पक्षियों की चहचहाहट मानसिक शांति प्रदान करती है और कीट-पतंगों को नियंत्रित कर पर्यावरण का संतुलन बनाए रखती है। इस तरह के सामूहिक प्रयास ही विलुप्त होती प्रजातियों को बचा सकते हैं। विभाग प्रमुख डा.दीपक पाठक ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक स्थलों का मिलन जब सामाजिक सरोकार के लिए होता है, तो परिणाम सकारात्मक होते हैं। पांच की संख्या का चयन हमारे वेदों और दर्शन से जुड़ा है। स्कूलों में इन घोंसलों को लगाने से नई पीढ़ी में जीव-जंतुओं के प्रति करुणा और संवेदनशीलता पैदा होगी, जो आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। संस्था संस्थापक पुष्पेन्द्र सिंह चौहान ने बताया कि यह अभियान केवल आज के दिन तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले समय में जिले के अन्य प्रमुख मंदिरों और विद्यालयों में इसी पंचतत्व मॉडल के आधार पर गौरैया आवास लगाए जाएंगे, ताकि गौरैया एक बार फिर हमारे आंगन और छतों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा सके। इस वर्ष अभियान की सबसे अनूठी पहल ची-ची ग्रुप का गठन है। जनपद ललितपुर के प्रत्येक वार्ड में बच्चों को संगठित कर यह ग्रुप बनाया जाएगा। इन नन्हे पर्यावरण प्रेमियों की जिम्मेदारी अपने आसपास के घरों में गौरैया के लिए दाना-पानी सुनिश्चित करना और लोगों को घोंसले लगाने के लिए प्रेरित करना होगा। बच्चों के जुड़ाव से यह अभियान एक संस्कार के रूप में विकसित होगा। इस पुनीत कार्य के साक्षी बनने हेतु नगर के कई प्रबुद्ध और प्रतिष्ठित नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से स्वतंत्र व्यास, सचिन जैन, गौ पुत्र प्रशांत शुक्ला, गौरव जैन, अशोक स्वर्णकार, संजय बुढ़वार, बलराम कुशवाहा, हरप्रसाद चौरसिया, एड. मुकेश साहू, कुलदीप द्विवेदी, नगर मंत्री गोपाल शर्मा, नीर जैन, और गौतमी जैन उपस्थित रहे। साथ ही महिला शक्ति और युवाओं की टोली में डा.प्रीति सिरोठिया, रिंकी, टिंकी, जानवी, सुंदरी, पिंकी, शालिनी, और अभय सहित बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी मौजूद रहे, जिन्होंने इस संकल्प को घर-घर पहुँचाने की शपथ ली।
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