झुंझुनू
लोहार्गल के श्री मिनेष भगवान मंदिर में मीणा समाज के आराध्य देव मत्स्य भगवान का जयंती समारोह धूम-धाम से मनाया
मीणा कोम के सरदारों ने लिए कई महत्वपूर्ण फैसले

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
झुंझुनूं। ज़िले के उदयपुरवाटी उपखंड क्षेत्र के निकटवर्ती प्रसिद्ध तीर्थराज लोहार्गल स्थित श्री मीन भगवान मंदिर एवं मीणा धर्मशाला में शनिवार को आदिवासी मीणा समाज के आराध्य देव मत्स्य भगवान जयंती समारोह धर्मशाला एवं मंदिर कमेटी अध्यक्ष सुरेश मीणा किशोरपुरा की अध्यक्षता में धूम-धाम से मनाया गया। जयंती कार्यक्रम में समाज के सरदारों ने धर्मशाला एवं मंदिर के कायाकल्प के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। शादी -विवाह समारोह एवं कई मांगलिक कार्यक्रमों की रस्मों में समाज के लोग लोहागर्ल में धर्मशाला के लिए अपनी श्रद्धा अनुसार सहयोग राशि देंगे। इसके लिए गांवो में संपर्क कर लोगों को जागरूक किया जाएगा। भामाशाहों से संपर्क कर धर्मशाला की दूसरी मंजिला भवन को तैयार करवाया जायेगा । मुख्य द्वार एवं धर्मशाला के रंग- रोगन एवं रख-रखाव का कार्य किया जाएगा। मौके पर धर्मशाला के रख-रखाव के लिए 50,000 का सहयोग जुटा लिया गया है। आगामी समय में जल्द ही धर्मशाला में समाज का एक महाकुंभ किया जाएगा जिसमें सीकर, झुंझुनू, चूरू के अलावा प्रदेश के सेवाभावी लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। कोषाध्यक्ष मोहन मीणा नांगल ने पटल के ऊपर पुराना लेखा-जोखा समाज के बीच रखा। इस अवसर पर समाज के लोगों ने आराध्य देव मत्स्य भगवान की विधिवत पूजा अर्चना कर पुष्प अर्पित किए।वक्ताओं ने कहा कि मत्स्य भगवान विष्णु भगवान के प्रथम अवतार हैं, ये चतुर्वेद की रक्षा के लिए अवतरित हुए थे। आदिवासी मीणा समाज का उद्गम इन्हीं से हुआ था। इस अवसर पर मीणा समाज पूर्व जिला अध्यक्ष बनवारी लाल मीणा उदयपुरवाटी, आदिवासी विकास परिषद के जिला अध्यक्ष रतन मीणा जोधपुरा,मीणा समाज के महामंत्री प्रकाश मीणा गुडा, लोहागर्ल के पूर्व अध्यक्ष मोहनलाल बोसाना,ताराचंद मीना सीकर, महामंत्री एडवोकेट अशोक मीणा उदयपुरवाटी, प्रभाती लाल उदयपुरवाटी, सोनाराम उदयपुरवाटी, मोहन मीणा नांगल, बचना राम मीणा नांगल, दिनेश मीणा उदयपुरवाटी, मुकेश मीणा उदयपुरवाटी, पूर्व बैंक मैनेजर सत्यनारायण मीणा पापड़ा, सेंटर स्कूल दिल्ली के पूर्व प्रिंसिपल रूडमल मीना पचलंगी, मक्खन लाल मीना सिंगनोर, सुमेर मीणा,बिरजू मीना जोधपुरा, महावीर मीणा पापड़ा, दिनेश कुमार गुड़ा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद थे।



