
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
बागपत। दिल्ली-देहरादून हाईवे पर लगे एक अस्थाई बैरियर ने बुधवार को दर्दनाक हादसे का रूप ले लिया, जिसमें एक इंजीनियर समेत दो युवकों की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरी कार के टकराने से दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद हाईवे की सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम मवीकलां निवासी राजकुमार ने बताया कि बुधवार सुबह करीब सात बजे सूचना मिली कि दिल्ली के नांगलोई निवासी 24 वर्षीय कपिल और उसका 25 वर्षीय साथी प्रयागराज कौशिक मंगलवार देर रात कार से देहरादून जा रहे थे। जैसे ही उनकी कार मवीकलां गांव के पास पहुंची, सड़क पर लगे अस्थाई बैरियर से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।हादसे के बाद मौके पर राहगीरों की भीड़ जुट गई, जिन्होंने तत्काल पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी। मौके पर पहुंची टीम ने दोनों घायलों को कार से निकालकर जिला अस्पताल बागपत पहुंचाया, जहां इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय प्रकाश ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।इसी दौरान, कुछ समय बाद एक और तेज रफ्तार कार उसी अस्थाई बैरियर से टकरा गई, जिसमें सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तत्काल निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।
कोतवाली प्रभारी बृजेश कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टया हादसे का कारण हाईवे पर लगा अस्थाई बैरियर है, जो पर्याप्त संकेतों और सुरक्षा व्यवस्था के बिना लगाया गया था।यह पहला मामला नहीं है जब हाईवे पर अस्थाई अवरोध जानलेवा साबित हुआ हो। इससे पहले भी कई बार अचानक लगाए गए बैरियर या बिना संकेतक के अवरोधों के कारण दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। बावजूद इसके, संबंधित एजेंसियों द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी लगातार जारी है।विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर यदि किसी प्रकार की रुकावट या मरम्मत कार्य किया जा रहा हो, तो उससे काफी पहले चेतावनी संकेत, रिफ्लेक्टर, फ्लैश लाइट और स्पष्ट बैरियर लगाए जाने चाहिए। अचानक सामने आए अवरोध से वाहन चालकों को संभलने का मौका नहीं मिलता, जिससे इस तरह के हादसे होते हैं।
मुआवजे की मांग
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मांग उठाई है कि इस तरह की लापरवाही से हुई मौतों का जिम्मा संबंधित हाईवे प्राधिकरण को लेना चाहिए और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जब लापरवाही सिस्टम की हो, तो उसकी सजा आम नागरिकों को नहीं भुगतनी चाहिए।यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। यदि समय रहते हाईवे सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो ऐसी घटनाएं आगे भी दोहराई जाती




