
अपहरण की कहानी निकली फर्जी, हर कदम पहले से था तय,कॉल डिटेल व पुराने विवाद खंगाल रही पुलिस, बढ़ सकता है आरोपियों का दायरा
मासूम को नशा देने के आरोप, झोलाछाप फरार,संपत्ति विवाद बना साजिश की जड़, पीड़ित परिवार में दहशत
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
कैराना । मोहल्ला इस्लामनगर में ‘ममता’ के नाम पर रची गई साजिश ने इंसानियत को झकझोर दिया है। जिस घटना ने पहले इलाके में सनसनी फैलाई थी, अब उसके खुलासे ने रिश्तों की बुनियाद पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। मां के रूप में भरोसे का चेहरा ओढ़कर मासूम को साजिश का मोहरा बनाने का मामला सामने आने से हर कोई स्तब्ध है। जांच में सामने आया है कि कथित अपहरण की कहानी पूरी तरह से फर्जी थी। बच्चे को छिपाने से लेकर अपहरण का शोर मचाने और निर्दोष लोगों को फंसाने तक की पूरी पटकथा पहले से तैयार की गई थी।
पुलिस के अनुसार यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि सुनियोजित आपराधिक साजिश थी, जिसमें मासूम की जान तक जोखिम में डाल दी गई।
पुलिस अब मामले को मजबूत करने में जुटी है। कॉल डिटेल, आपसी बातचीत और पुराने विवादों की गहन जांच की जा रही है, ताकि साजिश में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट हो सके। सूत्रों के मुताबिक, जांच का दायरा बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं। घटना के बाद मोहल्ले में आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिसने अपने ही बच्चे को साजिश का हथियार बनाया, वह किसी भी हद तक जा सकता है। विशेषज्ञों ने भी घटना को गंभीर बताते हुए कहा है कि बंद कमरे में घंटों तक कैद रहने और भय के माहौल का असर मासूम के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। ऐसे में बच्चे की काउंसलिंग और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठ रही है।
मासूम को नशा देने के आरोप
चर्चा है कि साजिश को अंजाम देने के लिए एक झोलाछाप के जरिए मासूम को नशीला पदार्थ दिया गया, ताकि वह बंद कमरे में शांत रहे और किसी को भनक न लगे। मामला खुलने के बाद कथित झोलाछाप फरार बताया जा रहा है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। अब विपक्षियों को साजिशकर्ताओं से खतरा बना हुआ है। मामले में जिन लोगों को झूठे केस में फंसाने की कोशिश की गई, उनके परिवार में दहशत है। पीड़ित पक्ष ने जानमाल की सुरक्षा की मांग की है।
फर्जी केस में पहले भी जा चुकी है जेल
मोहल्ला निवासी विधवा हनीफा के अनुसार, यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी उन्हें कथित रूप से साजिश के तहत फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजा जा चुका है।
संपत्ति विवाद से शुरू हुआ विवाद
बताया जा रहा है कि पूरा मामला संपत्ति विवाद से जुड़ा है। दाद इलाही की संपत्ति में हिस्सेदारी को लेकर विधवा हनीफा और उनके देवर महबूब के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। आरोप है कि इसी रंजिश के चलते साजिश रची गई। कैराना की यह घटना केवल आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी भी है। अब सबकी निगाहें पुलिस की आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई ही भविष्य में ऐसी साजिशों पर रोक लगा सकती है।
