गोड्डा

भीषण गर्मी में पशुओं की सुरक्षा जरूरी

हीट स्ट्रेस से बचाव के लिए पशुपालकों को दी गई सलाह

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

गाजियाबाद : जनपद में लगातार बढ़ रही गर्मी और लू के प्रकोप को देखते हुए मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी डॉ. एसपी पाण्डेय ने पशुपालकों एवं आमजन से पशु-पक्षियों की विशेष देखभाल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी के कारण पशुओं में “हीट स्ट्रेस” की समस्या तेजी से बढ़ती है, जिससे दूध उत्पादन में कमी, कमजोरी, भूख कम लगना, बुखार, गर्भपात और गंभीर स्थिति में मृत्यु तक हो सकती है।

डॉ. पाण्डेय ने बताया कि पशुओं के शरीर में लगभग 65 प्रतिशत तथा रक्त में करीब 80 प्रतिशत पानी होता है। ऐसे में गर्मी के मौसम में पानी की कमी होने पर शरीर की सामान्य क्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। इसलिए पशुओं को पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ एवं ठंडा पानी उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने पशुपालकों को सलाह दी कि पशुओं को दिन में कम से कम एक बार अवश्य नहलाएं और उन्हें छायादार स्थान पर रखें। टीन शेड वाले पशुशालाओं की छत पर घास या पराली डालने से तापमान कम रखा जा सकता है। साथ ही गर्म हवा से बचाने के लिए पर्दों की व्यवस्था भी करनी चाहिए।
मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यदि कोई पशु अत्यधिक हांफ रहा हो, मुंह से लार टपक रही हो, कमजोरी महसूस कर रहा हो या उसकी हृदय गति बढ़ गई हो, तो यह हीट स्ट्रेस के लक्षण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर उपचार कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भार ढोने वाले अथवा कार्य करने वाले पशुओं को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक अवश्य आराम दिया जाए। तापमान 37 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर इस नियम का पालन जरूरी है, अन्यथा इसे पशुओं के प्रति क्रूरता माना जा सकता है।
डॉ. पाण्डेय ने पशुपालकों को नियमित रूप से नमक, संतुलित पशु आहार एवं मिनरल मिक्सचर देने की भी सलाह दी। इससे पशुओं में तनाव कम रहेगा और दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
उन्होंने आमजन से भी अपील की कि निराश्रित पशुओं एवं पक्षियों के लिए घरों के बाहर तथा छतों पर पानी की व्यवस्था करें। पानी को समय-समय पर बदलते रहें और बर्तनों को छायादार स्थान पर रखें, ताकि गर्म पानी से पशु-पक्षियों को नुकसान न पहुंचे।
अंत में उन्होंने कहा कि गर्मी और लू से बचाव संबंधी इन उपायों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि पालतू और निराश्रित दोनों प्रकार के पशुओं को सुरक्षित रखा जा सके।
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