बाराबंकी

बाराबंकी जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर उठे गंभीर सवाल

सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट के लिए मरीजों को लगानी पड़ रही दूसरे जिलों की दौड़

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बाराबंकी। जनपद के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मारपीट के एक मामले में थाना सुबेहा क्षेत्र के इस्तखार अहमद मेडिकल परीक्षण कराने जिला अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें आवश्यक सीटी स्कैन रिपोर्ट न मिल पाने के कारण कई दिनों से बाराबंकी और लखनऊ के अस्पतालों के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पीड़ित इस्तखार अहमद ने बताया कि जिला अस्पताल में सीटी स्कैन मशीन तो मौजूद है, लेकिन रिपोर्ट तैयार करने वाले विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण उन्हें लखनऊ के लोहिया अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर भेजा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले लगभग 15 दिनों में वह दो बार लखनऊ ट्रॉमा सेंटर और एक बार लोहिया अस्पताल जा चुके हैं, लेकिन अब तक उनका सीटी स्कैन नहीं हो सका और हर जगह से उन्हें वापस रेफर कर दिया गया।
मामला केवल एक मरीज तक सीमित नहीं है। हाल ही में लोनीकटरा थाना क्षेत्र की एक महिला के मारपीट संबंधी मामले में अल्ट्रासाउंड कराया जाना था। जिला अस्पताल में संबंधित विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध न होने के कारण महिला को महिला अस्पताल भेजा गया। बताया गया कि महिला अस्पताल में भी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट तैयार करने वाले चिकित्सक अवकाश पर थे, जिसके चलते रिपोर्ट नहीं बन सकी।
सूत्रों के अनुसार अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की अंतिम रिपोर्ट केवल अधिकृत विशेषज्ञ चिकित्सक ही जारी कर सकते हैं। तकनीकी कर्मचारी जांच तो कर सकते हैं, लेकिन रिपोर्ट पर अंतिम चिकित्सकीय प्रमाणन नहीं दे सकते। ऐसे में मरीजों को समय पर मेडिकल रिपोर्ट न मिलने से न्यायिक प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि मारपीट और अन्य आपराधिक मामलों में पुलिसकर्मियों को भी पीड़ितों के साथ मेडिकल परीक्षण के लिए अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे पुलिस का समय और संसाधन दोनों प्रभावित होते हैं। गंभीर चोटों के मामलों में समय पर मेडिकल परीक्षण और रिपोर्ट न मिलने से पीड़ितों को न्याय मिलने में भी कठिनाई हो सकती है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) और अन्य अस्पतालों से मरीजों को बाराबंकी जिला अस्पताल रेफर किया जाता है, तो फिर जिला अस्पताल में सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट की व्यवस्था क्यों उपलब्ध नहीं है। यदि विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं हैं तो मरीजों को सीधे उच्च संस्थानों के लिए रेफर किए जाने की व्यवस्था क्यों नहीं की जाती?
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. रंजन गौतम से बात की गई। उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है और संबंधित अस्पतालों के अधिकारियों एवं चिकित्सकों से वार्ता कर आवश्यक समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि मरीजों को होने वाली परेशानी को गंभीरता से लेते हुए समस्या के शीघ्र निस्तारण के प्रयास किए जाएंगे।
स्वास्थ्य विभाग को करोड़ों रुपये का बजट मिलने के बावजूद यदि मरीजों को सामान्य जांच रिपोर्ट के लिए दूसरे जिलों की दौड़ लगानी पड़े, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को दर्शाता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक सुनिश्चित कर पाते हैं।
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