कानपुर

दहेज केस में दूसरा पक्ष आया सामने 

दावा 16 सबूतों के बाद बदली गई थी जांच

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कानपुर : काकादेव थाने में दर्ज दहेज उत्पीड़न के चर्चित मामले में नया मोड़ आ गया है। न्यायालय द्वारा तत्कालीन एसीपी स्वरूप नगर एवं आईपीएस अधिकारी सुमित रामटेके के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति के बाद अब दूसरे पक्ष ने सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। दूसरे पक्ष के अधिवक्ता अनिल कुमार सचान ने दावा किया है कि विवेचना में बदलाव किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए नहीं, बल्कि पीड़ितों द्वारा सौंपे गए पुख्ता दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए किया गया था।
6 महत्वपूर्ण सबूत सौंपकर की गई थी निष्पक्ष जांच की मांग अधिवक्ता के अनुसार, मुख्य आरोपी आयुष गुप्ता की मां ने तत्कालीन एसीपी को विस्तृत प्रार्थना-पत्र सौंपकर अपने परिवार को निर्दोष बताया था। आरोप है कि तत्कालीन विवेचक (उपनिरीक्षक श्यामवीर सिंह) महत्वपूर्ण साक्ष्यों को जांच का हिस्सा नहीं बना रहे थे। इसके बाद, पीड़ित परिवार ने बैंक रिकॉर्ड, क्रेडिट कार्ड भुगतान के दस्तावेज, अप्रैल-मई 2025 की सीसीटीवी फुटेज, व्हाट्सएप चैट, होटल जिम रिकॉर्ड, सेल्फी, बॉलिंग व रेस्टोरेंट की रसीदें और माफीनामे से जुड़े चैट समेत करीब 16 साक्ष्य पुलिस को सौंपे। इसके बाद मामले की जांच उपनिरीक्षक डालचंद्र राजपूत को सौंपी गई, जिन्होंने साक्ष्यों के परीक्षण के बाद केवल आयुष के खिलाफ कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल किया और अन्य परिजनों के नाम हटा दिए। शादी के 29 दिन बाद ही शुरू हुआ था विवाद वही बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने बताया कि आयुष का विवाह 16 नवंबर 2024 को गीता नगर निवासी निकिता जायसवाल के साथ बिना किसी दान-दहेज के हुआ था। विवाह के महज 29 दिन बाद ही दोनों अलग फ्लैट में रहने लगे। आरोप है कि 26 दिसंबर 2024 की देर रात निकिता के घर न लौटने पर जब आयुष ने उसकी तलाश की, तो वह एक पार्टी में मिली। इसकी शिकायत जब निकिता के परिजनों से की गई, तो 28 दिसंबर को निकिता के पिता नरेंद्र कुमार जायसवाल और मां श्यामलता उनके घर पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने घर आकर समझाने के बजाय अपने दामाद विकास पोरवाल उर्फ अरुण (जो उस समय काकादेव कोचिंग की एक नाबालिग छात्रा से रेप और पॉक्सो के आरोप में जेल में था) के प्रकरण में बड़े-बड़े अधिकारियों और पुलिस को मैनेज करने का दावा करते हुए आयुष के परिवार को भयभीत करने का प्रयास किया। इस बातचीत के सीसीटीवी और ऑडियो फुटेज भी पुलिस को सौंपे गए थे।
न्यायालय ने सभी आरोपियों को किया तलब, IPS पर कार्रवाई की संस्तुति। दूसरी ओर, इस मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़िता निकिता जायसवाल की ओर से कोर्ट में प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल की गई। इस पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पूर्व में क्लीन चिट पाए सभी आरोपियों को कोर्ट में तलब करने का आदेश जारी कर दिया। इसके साथ ही, विवेचना बदलने के मामले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन एसीपी व आईपीएस सुमित सुधाकर रामटेके के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की है। कोर्ट ने इस आदेश की प्रति पुलिस महानिदेशक (DGP) और प्रमुख सचिव गृह को भेजने के निर्देश दिए हैं। कौन हैं आईपीएस सुमित रामटेके?
सुमित सुधाकर रामटेके उत्तर प्रदेश कैडर के 2022 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल के रहने वाले रामटेके ने आईआईटी-बीएचयू से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद यूपीएससी में सफलता हासिल की थी। कानपुर कमिश्नरेट में तैनाती के दौरान अपराधियों और मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण उन्हें एक कड़क और तकनीक आधारित पुलिसिंग करने वाले अधिकारी के रूप में जाना जाता है।
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