
स्तंभकार सिद्धार्थ शर्मा बोले, स्वास्थ्य सेवा केवल पेशा नहीं, मानवता की सबसे बड़ी साधना
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर स्तंभकार सिद्धार्थ शर्मा ने चिकित्सकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डॉक्टर केवल रोगों का उपचार करने वाले विशेषज्ञ नहीं, बल्कि सेवा, संवेदना और विश्वास के प्रतीक हैं। भारतीय संस्कृति में चिकित्सकों को दूसरा भगवान का दर्जा इसलिए मिला है क्योंकि उनका जीवन मानवता की रक्षा और जनकल्याण के लिए समर्पित होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया: चिकित्सा विज्ञान की आधारशिला है। इसका उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति को स्वस्थ, रोगमुक्त और सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। यही कारण है कि भारत की चिकित्सा परंपरा विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध परंपराओं में गिनी जाती है। सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि आयुर्वेद के आदिदेव भगवान धन्वंतरि, महर्षि चरक और महर्षि सुश्रुत ने चिकित्सा विज्ञान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। महर्षि सुश्रुत को आज भी शल्य चिकित्सा का जनक माना जाता है। उस समय चिकित्सा सेवा को व्यवसाय नहीं, बल्कि लोककल्याण का माध्यम माना जाता था और वैद्य बिना किसी भेदभाव के रोगियों की सेवा करते थे। उन्होंने भारतीय महाकाव्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामायण में लक्ष्मण के मूर्छित होने पर शत्रु पक्ष के वैद्य सुषेण द्वारा उपचार किया जाना इस बात का प्रमाण है कि चिकित्सा का धर्म मानवता है, न कि मित्र और शत्रु का भेद। वहीं महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा युद्ध के बाद घायल घोड़ों की सेवा तथा सिखों के दसवें गुरु गुरु गोविंद सिंह द्वारा युद्धभूमि में मित्र और शत्रु दोनों के घायलों का उपचार करना भारतीय संस्कृति की करुणा और सेवा भावना का श्रेष्ठ उदाहरण है। उन्होंने कहा कि एक चिकित्सक बनने के लिए वर्षों तक कठिन अध्ययन, प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास करना पड़ता है। डॉक्टर के कंधों पर केवल एक पेशा नहीं, बल्कि अनमोल मानव जीवन की रक्षा का दायित्व होता है। यही कारण है कि मरीज डॉक्टर के पास केवल इलाज के लिए नहीं, बल्कि विश्वास के साथ पहुंचता है। स्तंभकार ने कहा कि महामारी और विभिन्न आपदाओं के दौरान चिकित्सकों ने अपने परिवारों से दूर रहकर और अपनी जान की परवाह किए बिना लाखों लोगों का जीवन बचाया। उनका यह समर्पण सदैव समाज के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान समय में चिकित्सा व्यवस्था बढ़ती जनसंख्या, संसाधनों की कमी, महंगी चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सकों पर बढ़ते कार्यभार जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार, समाज और चिकित्सा समुदाय को मिलकर ऐसी व्यवस्था विकसित करनी होगी, जिससे प्रत्येक नागरिक को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस के अवसर पर उन्होंने सभी चिकित्सकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनका सम्मान केवल शुभकामनाओं से नहीं, बल्कि उनके प्रति विश्वास, सहयोग और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के निर्माण से किया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि जब तक समाज में सेवा, संवेदना और मानवता के मूल्य जीवित रहेंगे, तब तक चिकित्सक दूसरे भगवान के रूप में सम्मानित होते रहेंगे।



