रांची

पूर्वी सिंहभूम में मलेरिया के बढ़ते मामलों पर कांग्रेस ने जताई चिंता, विशेष स्वास्थ्य पैकेज की मांग

Congress expresses concern over rising malaria cases in East Singhbhum; demands special health package.

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने पूर्वी सिंहभूम जिले में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से झारखंड के लिए 1,000 करोड़ रुपये के विशेष स्वास्थ्य पैकेज की मांग की है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की 29 जून से 10 जुलाई 2026 तक की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस अवधि में जिले में 77,770 लोगों की मलेरिया जांच की गई, जिसमें 71,849 रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) और 5,921 स्लाइड जांच शामिल हैं। जांच में 1,731 लोगों में मलेरिया संक्रमण की पुष्टि हुई है, जबकि अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है। विजय शंकर नायक ने कहा कि 10 जुलाई को अकेले 14,200 लोगों की जांच की गई, जिसमें 128 नए संक्रमित मरीज मिले। उन्होंने बताया कि पोटका, घाटशिला, पटमदा और डुमरिया जैसे प्रखंडों में संक्रमण के अधिक मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के लिए सबसे बड़ी चिंता प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम (PF) संक्रमण है, जो गंभीर मलेरिया का कारण बन सकता है। उनके अनुसार, पिछले 12 दिनों में मिले संक्रमित मरीजों में बड़ी संख्या इसी वेरिएंट से प्रभावित है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि पूर्वी सिंहभूम के आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया का तेजी से फैलना चिंता का विषय है। उन्होंने केंद्र सरकार पर पर्याप्त संसाधन और तकनीकी सहयोग उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाते हुए कहा कि मानसून से पहले प्रभावित क्षेत्रों में दवाइयां, जांच किट और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए थीं। उन्होंने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे जांच अभियान, चिकित्सा दलों की तैनाती, घर-घर स्क्रीनिंग, दवा वितरण और मच्छर नियंत्रण कार्यक्रमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सक्रिय रूप से काम कर रही है, लेकिन बड़े स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए केंद्र का सहयोग जरूरी है। विजय शंकर नायक ने केंद्र सरकार से मांग की कि— पूर्वी सिंहभूम सहित मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों के लिए 1,000 करोड़ रुपये का विशेष केंद्रीय स्वास्थ्य सहायता पैकेज जारी किया जाए। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत झारखंड को अतिरिक्त वित्तीय एवं तकनीकी सहायता दी जाए। विशेषज्ञ चिकित्सकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की केंद्रीय टीम प्रभावित क्षेत्रों में भेजी जाए। मलेरिया जांच किट, एंटी-मलेरियल दवाओं, कीटनाशकों और मच्छरदानियों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल मेडिकल यूनिट और विशेष स्वास्थ्य शिविर संचालित किए जाएं। मलेरिया से मृत लोगों के परिजनों को सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार समन्वय स्थापित करें। उन्होंने कहा कि जनस्वास्थ्य के मुद्दों पर राजनीति के बजाय संवेदनशीलता और जवाबदेही की जरूरत है। पूर्वी सिंहभूम का मलेरिया संकट समय रहते प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता को दर्शाता है।

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