बरेली
UP सहकारी समिति अधिनियम 1965 में बदलाव की मांग तेज
गृह निर्माण समितियों के लिए आधुनिक कानून की आवश्यकता
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बरेली। उत्तर प्रदेश में बढ़ते शहरीकरण के बावजूद गृह निर्माण सहकारी समितियों का संचालन आज भी छह दशक पुराने सहकारी समिति अधिनियम, 1965 के तहत हो रहा है। विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने इसमें व्यापक संशोधन की मांग की है। विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने कानून के कारण कई समितियों में वर्षों तक चुनाव नहीं होते, वित्तीय रिकॉर्ड नहीं मिलते और सीमित लोगों का नियंत्रण बना रहता है। इससे पारदर्शिता और लोकतंत्र प्रभावित हो रहा है।
मांग उठी है कि समितियों के लिए अलग आधुनिक नियामक ढांचा बने। इसमें ऑनलाइन सदस्यता, डिजिटल रिकॉर्ड, ई-गवर्नेंस, अनिवार्य ऑडिट और वित्तीय जवाबदेही शामिल हो। साथ ही विकसित कॉलोनियों को समय-सीमा में नगर निगम को हस्तांतरित करने की व्यवस्था बने ताकि नागरिक सुविधाओं का बेहतर रखरखाव हो सके।
संगठनों ने सरकार से उच्चस्तरीय समिति बनाकर तकनीक आधारित नागरिक हितैषी कानून बनाने की मांग की है।



