बालाघाट

एसआईटी जाँच पर घमासान

बहुचर्चित चावल घोटाला मामला, हर्ष राइस मिल के संचालक कुमार कावरे अब तक गिरफ्त से दूर 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : बहुचर्चित चावल घोटाला मामले में जैसे-जैसे पुलिस की जांच बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे ही पुलिस की कार्रवाई पर भी सवालिया निशान लगते जा रहे है, और अब तो कांग्रेस खुलकर पुलिस पर सत्ता के दबाव में कार्रवाई कर सत्ता से जुड़े लोगों को बचाने का प्रयास कर आरोप लगा रहे है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष के बाद अब बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे ने तो स्थानीय सर्किट हाउस में वार्ता लेकर सीधे तौर पर कहा कि भाजपा शासित मध्यप्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री व जिले की भाजपा के जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे अपने भाई, भतीजे को बचाने के लिए अपनी रसूखदारी का इस्तेमाल कर एसआईटी की जांच को प्रभावित कर रहे है।
जांच में नाम फिर भी रहे बच, संदेह की बात 
बालाघाट विधायक ने कहा कि चावल घोटला मामले में पुलिस अधीक्षक अादित्य मिश्रा के नेतृत्व में गठित की कार्रवाई एसआईटी की जांच में ये सामने आ चुका है, कि टेकाड़ी में संचालित हर्ष राइस मिल जहां से सरकारी चावल की अफरा-तफरी की गई है, उसके संचालक भाजपा जिलाध्यक्ष राम किशोर कावरे के भाई कुमार कावरे है, और उनके भतीजे अविनाश कावरे भी इसके मालिक में शामिल है,बावजूद इसके पुलिस पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया है, वहीं उनके महज 20 प्रतिशत के पार्टनर विनाेद शर्मा को गिरफ्तार किया है। जिससे ये साफ जाहिर होता है, कि पुलिस सत्ता के दबाव में काम कर रही है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी संदेह उत्पन्न हाे रहा है।
डबल मनी में पूर्व जिलाध्यक्ष का नाम यहां भी हो बचाव
करोड़ाे के चावल की अफरा-तफरी मामले के साथ ही बहुचर्चित डबल मनी घोटाला में भी लांजी के पूर्व विधायक व भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रमेश भटेरे को लेकर भी बालाघाट विधायक ने आरोप लगाया है।यहां उन्होंने कहा कि डबल मनी के मुख्य आरोपी सोमेन्द्र कंकरायने की लग्जरी कार उनके पीएसओ के पास से मिली है, जिससे ये साफ जाहिर होता है कि इस मामले में वे भी सीधे तौर पर जुड़े है, वहीं पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन के रिश्तेदारों के नाम भी शामिल है, और ये सभी स्वयं व अपनों को बचाने के लिए भोपाल के चक्कर भी काट रहे है।
इस्तीफा और गिरफ्तारी नहीं हुई तो होगा जन आंदोलन
वार्ता के दौरान बालाघाट विधायिका ने कहा कि भाजपा के जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे को वैसे तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए पर वे ऐसा करने के बजाय जांच की प्रभावित कर रहे है। ऐसे में संगठन के राष्ट्रीय व प्रदेश नेतृत्व को उन्हें जिलाध्यक्ष के पद  से हटा देना चाहिए, वहीं उनके भाई व भतीजे की जल्द गिरफ्तारी होना चाहिए और ऐसा नहीं होता है, तो फिर जिला कांग्रेस के बैनर वे लोग सड़क पर उतरकर जन आंदोलन करेंगे।
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