95 वर्षीय बुजुर्ग सोनदेवी हरिद्वार से पालकी में बैठकर हापुड पहुंचीं 24 पोते बने श्रवण कुमार

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
हापुड़ (यूपी)- यूपी के जनपद हापुड में पहुंची अनोखी कांवड़,95 साल की बुजुर्ग दादी को हरिद्वार से पालकी में लेकर उनके 24 पोते पहुंचे हैं । दादी की खुशहाली और परिवार की खुशहाली कीमन्नत मांगते हुए पालकी में दादी अम्मा सवार देखी गईं । दादी अम्मा ने हापुड देहात थाना प्रभारी पारस मलिक को भी आशीर्वाद दिया।
यूपी के जनपद हापुड़ से एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने हर किसी को भावुक कर दिया है । डीजे की धुन , बोलबम के जयघोष और लाखों शिवभक्तों के बीच 95 वर्ष की दादी सोणदेवी की पालकी लोगों के बीच आकर्षण का केद्र बन गई है । दादी की वर्षों पुरानी इच्छा पूरी करने के लिए परिवार के 24 पोते श्रवण कुमार बन गए और उन्हें हरिद्वार में गंगास्नान कराने के बाद पालकी में बैठाकर बुलंदशहर स्थित अपने गांव ले जा रहे हैं।
बुलंदशहर के हसनपुर जागीर निवासी 95 वर्षीय सोनदेवी की लंबे समय से इच्छा थी कि वह हरिद्वार जाकर मां गंगा में स्नान करें और भोलेनाथ के दर्शन करें,लेकिन करीब एक साल पहले हुए सड़क हादसे के बाद उनके लिए,चलना,फिरना मुश्किल हो गया,ऐसे में परिवार के युवाओं ने उनकी इच्छा को अपना संकल्प बना लिया।
‘महाकाल ग्रुप’ के नाम से यात्रा कर रहे उनके 24 पोते दादी को हरिद्वार ले गए, वहां गंगास्नान कराया और अब पालकी में बैठाकर गांव तक लेकर जा रहे हैं। यात्रा के दौरान सभी पोते बारी-बारी से पालकी अपने कंधों पर उठाते हैं, ताकि किसी एक पर अधिक भार न पड़े और दादी को कांवड़ पूरी यात्रा आराम से कराई जा सके।
हापुड़ पहुंचने पर इस अनोखी यात्रा का लोगों ने स्वागत किया। हापुड देहात थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पारस मलिक ने भी दादी का स्वागत कर उनका आशीर्वाद लिया।पालकी में बैठी दादी को देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी । कई लोगों ने उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया, जबकि अनेक श्रद्धालुओं ने इस भावुक पल को अपने कैमरे में कैद किया।
श्रद्धालुओं ने बताया कि दादी की बस एक ही इच्छा थी कि वह हरिद्वार के दर्शन करें। उसी इच्छा को पूरा करने के लिए पूरा परिवार एकजुट हुआ और आज उनकी मुस्कान ही सभी पोतों के लिए सबसे बड़ा आशीर्वाद बन गई परिवार ने कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाओं की भी सराहना करते हुए कहा कि पूरी यात्रा में कहीं किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा।
सावन की कांवड़ यात्रा के बीच सामने आई यह तस्वीर केवल आस्था की नहीं, बल्कि बुजुर्गों के प्रति सम्मान, परिवार के संस्कार और सेवा-भाव की भी एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई है।




