स्वाधीनता संग्राम से भी पहले की लड़ाई हूल क्रांति– श्रीकुमार सरकार
Hul Kranti – a battle before the freedom struggle – Shrikumar Sarkar

नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो।
पाकुड़। 30 जून 2025 सोमवार को पाकुड़ में कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस पदाधिकारियों एवं दर्जनों कार्यकर्ताओ के साथ सिद्धों कान्हू पार्क पहुंचकर वीर शहीद सिद्धों कान्हू मुर्मू की अदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हे श्रद्धांजलि अर्पित किया। नमन करते हुए जिला अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार ने कार्यकर्ताओ को सम्बोधित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में कहा कि 1857 का सिपाही विद्रोह वस्तुतः राष्ट्रीय स्तर पर अंग्रेजी शासन के विरूद्ध स्वतंत्रता की पहली लड़ाई मानी जाती है। परन्तु इसके पूर्व संथाल विद्रोह हुआ था, कार्ल मार्क्स ने इस विद्रोह को भारत का प्रथम जनक्रांति कहा था। श्रीकुमार सरकार ने कहा अंग्रेजी हुकूमत की जड़ हिलाने वाले एवं स्वदेशी महाजन जमींदारी प्रथा को उखाड़ फेंकने वाले आपने शौर्य के बल पर पारंपरिक हथियारों से विदेशी हथियारों का सामना करने वाले महान क्रांतिकारी वीर शहीद आदिवासियों की संघर्ष गाथा है। जो सिद्धों कान्हू की याद में हुल क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे संथाल विद्रोह के नाम से भी जाना जाता है। वही सिद्धों- कान्हू ने अबुआ राज अबु दिशाेम करो या मरो अंग्रेजो हमारी माटी छोड़ो का नारा दिया। जिसमें संथाल तीर-धनुष से लैस अंग्रेजो पर टुट पड़े थे। जिसमें कई हत्याएं हुई, इससे अंग्रेजो में भय का माहौल बन गया।जिससे बचने के लिए पाकुड़ में मार्टिलो टावर का निर्माण कराया गया था, जो आज भी पाकुड़ में स्थित है। आधुनिक हथियारो व गोला बारूद के बल पर अंग्रेजो ने इस मुठभेड़ में विजय तो प्राप्त कर ली, परन्तु इस विद्रोह ने अंग्रजी हुकूमत की जड़ हिला दी। जिसके फलस्वरूप आज भी महान क्रांतिकारी वीर शहीद के रूप में सभी के दिलो में विराजित है। इसी कारण झारखण्ड में हूल दिवस महत्वपूर्ण समारोह को रूप में मनाया जाता है, जो आज भी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत है। मौके पर पाकुड़ प्रखण्ड अध्यक्ष मानसारुल हक, विधायक प्रतिनिधि गुलाम अहमद, कोषाध्यक्ष अशद हुसैन, अल्पसंख्यक अध्यक्ष शाहीन परवेज, जिला महासचिव कृष्णा यादव, रामविलास महतो, नगर अध्यक्ष वंशराज गोप, सफीक अहमद, अहेदिन शेख, मीरजहन शेख, मानिक हसदा, ज़हरुल शेख, नजरुल शेख, मिथुन मरांडी, लाखफोर शेख, मो० बबलू, हसानुज ज़मान, तैमूर आलम सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे।



