गोड्डा

अंग्रेज़ी दौर का डाकबंगला, आज भी थाना भवन के रूप में जीवित

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

गोड्डा : जिले का राजाभीठा थाना महज़ एक पुलिस भवन नहीं, बल्कि ब्रिटिश काल की वास्तुकला और उस दौर की कहानियों का सजीव दस्तावेज़ है। लगभग एक सदी पुराना यह भवन कभी अंग्रेज अधिकारियों का डाकबंगला हुआ करता था, जहाँ वे लंबे सफ़र के बाद ठहरते थे, बैठकों का आयोजन करते थे और आसपास के इलाक़ों का निरीक्षण करने निकलते थे। घने जंगलों और पहाड़ी रास्तों के बीच बसा यह डाकबंगला यात्रियों के लिए भी एक सुरक्षित ठिकाना था। स्थानीय बुज़ुर्ग बताते हैं कि यहाँ रात में लालटेन की मद्धम रोशनी में चौकीदार गश्त लगाता था। भवन के चारों ओर ऊँची बाड़ और सुरक्षा चौकियाँ होती थीं। आज भी इस भवन की मोटी पत्थर की दीवारें, लकड़ी के नक्काशीदार दरवाज़े-खिड़कियाँ, ऊँची छत और चौड़े बरामदे वही पुराने दिनों की झलक दिखाते हैं। गर्मियों में भी इसकी दीवारें अंदर ठंडक बनाए रखती हैं, मानो समय यहां ठहर गया हो। बरामदे में रखी पुरानी लोहे की कुर्सियाँ और छत के लकड़ी के शहतीर इतिहास की मूक गवाही देते हैं। 1947 में आज़ादी मिलने के बाद, इसे राजाभीठा थाना भवन के रूप में परिवर्तित कर दिया गया। यहाँ से न केवल कानून व्यवस्था देखी जाती है, बल्कि यह भवन ग्रामीणों के लिए पहचान और गर्व का प्रतीक भी है। थाने में तैनात पुलिसकर्मियों का मानना है कि यह भवन किसी भी आधुनिक इमारत से अलग और खास है। उनकी राय में, इसे पुरातात्विक धरोहर के रूप में संरक्षित किया जाना चाहिए। गाँव के बुज़ुर्ग अक्सर कहते हैं— “यह सिर्फ एक थाना नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों का इतिहास है।” हालांकि, समय और मौसम की मार से भवन के कुछ हिस्सों में दरारें आने लगी हैं। बरसात के मौसम में पानी रिसने की समस्या भी सामने आती है। स्थानीय लोग चाहते हैं कि सरकार इस ऐतिहासिक धरोहर की मरम्मत और संरक्षण के लिए विशेष पहल करे, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी अंग्रेज़ी दौर के इस गवाह को अपनी आँखों से देख सकें।
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