
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। जिले से लगभग 33 किलोमीटर दूर सावंगी स्थित मां पीताम्बरा सिद्धपीठ आज देश-विदेश के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बन गया है। यहां के पीठाधीश्वर आचार्य रविन्द्र मानकर को मां बगलामुखी मंदिर सिवनी की परम तपस्विनी संत देवी ज्ञानेश्वरी गोस्वामी और संत सद्गुरुदेव डॉ. सत्यनारायण गिरी गोस्वामी महाराज से अनेक दिव्य शक्तिया प्राप्त हुई हैं। आचार्य जी अब तक 36 से अधिक सवा लाख मां बगलामुखी बीज मंत्र के पुरुश्चरण पूर्ण कर चुके हैं।
मां बगलामुखी के इस सिद्धपीठ की ख्याति इतनी बढ़ गई है कि अब भक्तों को नलखेड़ा, दतिया या बनखंडी जाने की आवश्यकता नहीं रहती, क्योंकि मां स्वयं अपने भक्तों को सावंगी बुला रही हैं।
पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के खिदिरपुर निवासी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीआईएसएफ) में कार्यरत अरुण दे ने मां बगलामुखी साधना से अपने जीवन में आए चमत्कारिक परिवर्तन का अनुभव साझा किया है। अरुण दे ने बताया कि उनकी कोई गलती न होने के बावजूद विभागीय अधिकारियों ने उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की, उन्हें लंबी छुट्टी पर भेज दिया गया और वेतन आधा कर दिया गया। कई प्रयासों के बाद भी जब कोई समाधान नहीं मिला, तब उन्होंने मां बगलामुखी की शरण ली।
– वीडियो कॉल के माध्यम से दी मंत्र दीक्षा
इसी दौरान उन्हें मां बगलामुखी शक्ति सिद्धपीठ सावंगी के आचार्य रविन्द्र मानकर के साधना सम्बन्धी वीडियो प्राप्त हुए। उन्होंने गुरुजी से ऑनलाइन संपर्क किया, जहां आचार्य जी ने वीडियो कॉल के माध्यम से मंत्र दीक्षा दी और कुंडली विश्लेषण कर उचित साधना मार्ग बताया। गुरुजी के निर्देशानुसार अरुण दे ने 11 और 21 हजार बीज मंत्रों का जाप किया तथा गुरु अभिमंत्रित नीलम और मूंगा रत्न धारण किए। कुछ ही समय में उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगे। आत्मबल, आत्मविश्वास और संकल्प शक्ति में वृद्धि हुई, जिससे उनके वरिष्ठ अधिकारी भी आश्चर्यचकित रह गए। अंततः माँ बगलामुखी के आशीर्वाद से अरुण दे की नौकरी पुनः बहाल हो गई।
– मां बगलामुखी का यज्ञ करने से परास्त होता है शत्रु
आचार्य रविन्द्र मानकर ने बताया कि मां बगलामुखी का यज्ञ करने से शत्रु परास्त होता है, जीवन में तरक्की और खुशहाली आती है। उन्होंने कहा कि सेना या सीएपीएफ के जवानों का जीवन संघर्षमय होता है, कई बार निर्दोष होकर भी वे अन्याय का सामना करते हैं, ऐसे में मां बगलामुखी साधना उनके लिए आस्था और आत्मबल का महान साधन सिद्ध होती है।
आचार्य जी ने यह भी कहा कि जब पूरी दुनिया आपके विरुद्ध खड़ी होती है, तब एक सच्चा गुरु ही आपको संभालता है। गुरु ही वह शक्ति है जो ज्ञान, विज्ञान और आत्मविश्वास प्रदान करती है, जिससे व्यक्ति बड़ी सफलता प्राप्त करता है। मां पीताम्बरा सिद्धपीठ सावंगी इसी आस्था और दिव्यता का सजीव प्रतीक बन चुका है।



