गाजियाबाद
मीरपुर हिन्दू में डंपिंग ग्राउंड का विरोध, शांतिपूर्ण धरने पर बैठे किसानों पर पुलिस का लाठीचार्ज, छह ग्रामीण गिरफ्तार;
पीड़ित ग्रामीणों ने पूछा,क्या अपने हक़ की बात करना गुनाह है?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : लोनी विकास खंड की ग्राम पंचायत मीरपुर हिन्दू में डंपिंग ग्राउंड निर्माण के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से बैठे किसानों और ग्रामीणों पर बुधवार को पुलिस टीम ने लाठीचार्ज कर दिया। मौके से छह किसानों को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि अन्य लोगों को बल प्रयोग कर तितर-बितर कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना बात सुने उन पर ज्यादती की गई और उनकी जायज़ मांगों को दबाने का प्रयास किया गया।
गौरतलब है कि मीरपुर हिन्दू गांव की जिस भूमि पर सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट प्रस्तावित है, वह गाजियाबाद नगर निगम को वैज्ञानिक पद्धति से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए उपलब्ध कराई गई है।
इस संबंध में खतौली विधायक मदन भैया पहले ही विरोध दर्ज कराते हुए मंडल आयुक्त मेरठ व प्रदेश सरकार को पत्र लिख चुके हैं। उनका कहना है कि लोनी पहले ही कूड़े-कचरे के ढेरों से स्लम में तब्दील हो चुकी है, ऐसे में नया डंपिंग ग्राउंड यहां के पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य के लिए विनाशकारी साबित होगा।
ग्रामीणों का कहना है कि मीरपुर हिन्दू यमुना नदी के किनारे और दिल्ली सीमा के बेहद समीप स्थित संवेदनशील क्षेत्र है। यहां पहले से ही प्रदूषण और कूड़े के ढेरों ने लोगों का जीवन नारकीय बना दिया है। इसी चिंता को लेकर ग्रामीणों, किसानों और कॉलोनीवासियों ने डंपिंग ग्राउंड का विरोध करते हुए अपनी आवाज़ उठाई।
बीते दिनों सैकड़ों लोग भाजपा विधायक नंदकिशोर गुर्जर के निवास पर भी पहुंचे थे और निर्माण कार्य रोकने की मांग की थी, जिस पर विधायक ने शासन स्तर पर बात करने का आश्वासन दिया था।
प्रशासनिक दबाव में बल प्रयोग, सवालों के घेरे में पुलिस कार्यवाही
बुधवार को उपजिलाधिकारी दीपक सिंघनवाल, अधिशासी अधिकारी के.के. मिश्रा, चीफ फूड एवं सैनेट्री इंस्पेक्टर संजीव अवाना और नगर निगम की टीम भारी पुलिस बल के साथ डंपिंग ग्राउंड स्थल पर पहुंची। उस समय किसान शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों ने केवल हटने का आदेश दिया, लेकिन जब किसानों ने साफ कहा कि पहले डंपिंग ग्राउंड निर्माण रद्द करने की लिखित आश्वासन दिया जाए, तभी वे हटेंगे — तभी अचानक लाठीचार्ज कर दिया गया।
लाठीचार्ज में कई किसान घायल हुए और छह लोगों को हिरासत में ले लिया गया। मौके पर डंपिंग ग्राउंड का ताला भी तोड़ दिया गया। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने सवाल उठाया—
क्या स्वच्छ और सुरक्षित जीवन की मांग करना अपराध है?
क्या लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना कानून का उल्लंघन है?
बिना वजह शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करना न्याय है या प्रशासनिक दमन?
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने उनकी एक भी बात नहीं सुनी और सीधे बल-प्रयोग का रास्ता अपनाया। उनका आरोप है कि विकास के नाम पर उन्हें बीमारियों, प्रदूषण और बदबूभरे जीवन के लिए मजबूर किया जा रहा है।
“हक़ की लड़ाई जारी रहेगी” — किसानों का ऐलान
गिरफ्तार किसानों की रिहाई और डंपिंग ग्राउंड प्रस्ताव निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने आंदोलन तेज करने का संकेत दिया है। उनका कहना है कि
“हम अपनी ज़मीन, पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। यह कोई राजनीतिक आंदोलन नहीं, बल्कि अस्तित्व बचाने की लड़ाई है।”



