गाजियाबाद

डॉक्टरों ने दो साल से रीढ़ की समस्या से परेशान युवक को फिर से सीधा खड़ा और चलने योग्य बनाया

Doctors made a young man suffering from spinal problems for two years stand straight and walk again

गाज़ियाबाद, मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली के डॉक्टरों ने गाज़ियाबाद के रहने वाले एक 35 वर्षीय युवक की दुर्लभ और अत्यंत जटिल स्पाइनल सर्जरी करके उसे फिर से चलने और सीधा खड़ा होने में सक्षम बनाया। यह सर्जरी उस व्यक्ति के लिए जीवन बदलने वाली साबित हुई,जो पिछले दो वर्षों से गंभीर स्पाइनल डेफोर्मिटी के साथ जी रहे थे। इस सर्जरी ने उन्हें न केवल आजीवन विकलांगता से बचाया बल्कि एक सामान्य एवं सक्रिय जीवन जीने का नया अवसर दिया। अस्पताल के डॉक्टर ने बताया कि मरीज़ दो साल पहले छह मंजिला इमारत से फिसलकर गिर गए थे जिस हादसे की वजह से उन्हें कई गंभीर चोटें आईं, जिनमें उनकी रीढ़ की हड्डी के के निचले हिस्से में फ्रैक्चर-डिसलोकेशन भी शामिल था। उन्हें पास के एक अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां अन्य चोटों का इलाज तो हो गया, लेकिन रीढ़ की गंभीर चोट को नजरअंदाज कर दिया गया। धीरे-धीरे जब वह बाकी चोटों से उबरने लगे, तो उनकी रीढ़ की हड्डी गलत पोजीशन में जुड़ गई, जिससे उनकी रीढ़ स्थायी रूप से टेढ़ी हो गई। ऐसे में उन्होंने मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली में इलाज कराने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों द्वारा पूरी जांच की गई जिसमे यह सामने आया कि उन्हें स्पाइन के निचले हिस्से में पुरानी और अनदेखी ‘स्पाइनोपेल्विक फ्रैक्चर डिसलोकेशन’ की समस्या थी। इस कारण उनकी रीढ़ की हड्डी आगे-पीछे से बुरी तरह असंतुलित हो चुकी थी, जिससे वह चलने-फिरने या खड़े होने में असमर्थ थे। मैक्स हॉस्पिटल वैशाली के स्पाइन सर्जरी व स्पाइनल डिफॉर्मिटी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. नवीन पंडिता ने बताया कि मरीज़ बहुत तेज पीठ दर्द के साथ हमारे पास आए थे और न तो वह सीधे खड़ा हो पा रहे थे और ना ही पीठ के बल लेट पा रहे थे, और मुश्किल से कुछ कदम ही चल पा रहे थे, केस की जटिलता को देखते हुए हमने एडवांस्ड स्पाइनल नेविगेशन और न्यूरोमॉनिटरिंग के माध्यम से स्पाइनल डिफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी करने का तय किया। पारंपरिक मिडलाइन चीरे के बजाय हमने रॉकेट-शेप तकनीक का इस्तेमाल किया, जिससे हमें बेहतर एक्सेस मिला और आसपास के टिशू को कम नुकसान पहुंचा। इस लेटेस्ट तरीके से सर्जरी के परिणामों में उल्लेखनीय सुधार हुआ और मरीज़ की रिकवरी बेहतर रही। ऑपरेशन के बाद मरीज़ के पोस्चर और डेफोर्मिटी में जबरदस्त सुधार हुआ और वह दो साल बाद पहली बार सीधे खड़े होकर चल सके।

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