
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
सिंगरौली। सिंगरौली जिले के पिड़रवाह स्थित THDC परियोजना क्षेत्र के धुम्माड़ाड गांव के भू-स्वामियों और विस्थापितों ने एक बार फिर प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का आरोप है कि कंपनी ने वर्षों पहले उनकी जमीन लेकर कोयला खनन, डीज़ल टंकी और वृक्षारोपण कार्य शुरू किया, लेकिन आज तक रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास पैकेज जैसी मूलभूत सुविधाएँ नहीं दी गईं।
पीड़ित विस्थापितों ने कलेक्टर सिंगरौली को ज्ञापन सौंपकर कहा कि वे ग्राम पिड़रवाह धुम्माड़ाण के निवासी और करीब 50 एकड़ भूमि के पट्टाधारी भू-स्वामी हैं। कंपनी ने बिना किसी विरोध के उनकी भूमि पर कार्य आरंभ किया, परंतु आज तक न तो रोजगार भत्ता मिला, न ही किसी प्रकार का पैकेज या पुनर्वास सहायता प्रदान की गई।
ग्रामीणों ने बताया कि कंपनी द्वारा लगातार वर्कशॉप निर्माण का कार्य किया जा रहा है, जबकि विस्थापितों की मांगें अब भी अधूरी हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि —
“जब तक हमें रोजगार, मुआवजा और समस्त सुविधाएँ नहीं दी जातीं, तब तक हम अपने पट्टे की जमीन पर किसी भी निर्माण कार्य को नहीं होने देंगे।”
विस्थापितों का कहना है कि कई परिवारों के मकान का मुआवजा तक अब तक नहीं दिया गया है। उन्होंने मांग की है कि छूटे हुए भू-स्वामियों को उनका हक, मकान का मूल्य, और शिक्षा-स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएँ तुरंत दी जाएँ।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि
“जब तक विस्थापन की सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक THDC कंपनी की जिम्मेदारी तय की जाए और आगे का कोई भी निर्माण कार्य रोका जाए।”
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो वे कंपनी के खिलाफ आंदोलन करने को विवश होंगे।




