दिल्लीराजनीतिराष्ट्रीय

नई शृंखला के तहत भारत की तीसरी तिमाही की जीडीपी वृद्धि दर घटकर 7.8% हुई

जानिए दूसरी तिमाही से क्या बदला

नई दिल्ली । क्या भारतीय अर्थव्यवस्था ने फिर चौंकाया? वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी ग्रोथ अनुमानों को पछाड़ते हुए 7.8% पर पहुंच गई है। त्योहारी मांग और जीएसटी कटौती के असर को इस आसान सवाल-जवाब वाली रिपोर्ट में समझें।
भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपने मजबूत प्रदर्शन से बाजार और अर्थशास्त्रियों को चौंका दिया है। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद ) के आंकड़े जारी हो गए हैं, जिसने 7.8 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है। चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 8.4% थी। देश की अर्थव्यवस्था की इस तेज रफ्तार और इसके पीछे के मुख्य कारणों को आइए एक आसान सवाल-जवाब के जरिए विस्तार से समझते हैं।
वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के ताजा जीडीपी आंकड़े क्या कहते हैं?
नए आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में खत्म हुई तीसरी तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 प्रतिशत की मजबूत दर से बढ़ी है। देश के आर्थिक आंकड़ों के हालिया ‘रीसेट’ के बीच आई यह रिपोर्ट देश के सकारात्मक आर्थिक रुझान को स्पष्ट रूप से दशार्ती है।
बाजार के जानकारों का क्या अनुमान था और असली आंकड़े उससे कितने बेहतर हैं?
अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि दिसंबर तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी (यह अनुमान 7% से 8.7% के दायरे में था)। लेकिन 7.8 प्रतिशत का वास्तविक आंकड़ा यह साबित करता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां बाजार की उम्मीदों से कहीं ज्यादा बेहतर स्थिति में हैं।
जीडीपी में इस शानदार उछाल के मुख्य कारण क्या रहे हैं?
इस तेज वृद्धि के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े फैक्टर काम कर रहे हैं:
त्योहारी मांग: तीसरी तिमाही के दौरान त्योहारों का सीजन होने की वजह से बाजार में उपभोक्ताओं की मांग में जबरदस्त इजाफा देखा गया।
जीएसटी में कटौती: सरकार द्वारा विभिन्न सेक्टर्स में की गई जीएसटी कटौती ने उत्पादन को बढ़ाने में बड़ा सहारा दिया है, जिसका सीधा असर विकास दर पर पड़ा है।
पिछले साल और पिछली तिमाही के मुकाबले यह प्रदर्शन कैसा है?
अगर पिछले साल की इसी तिमाही से तुलना करें, तो तब जीडीपी ग्रोथ 6.2 प्रतिशत (2011-12 आधार वर्ष के साथ) रही थी। इसका मतलब है कि सालाना आधार पर विकास की गति में बड़ा सुधार हुआ है। हालांकि, इससे ठीक पिछली तिमाही में यह वृद्धि 8.2 प्रतिशत थी, जिसके मुकाबले इस बार (7.8%) क्रमिक आधार पर थोड़ी नरमी जरूर आई है। लेकिन कुल मिलाकर यह एक बेहद मजबूत आंकड़ा है।
अब आगे क्या उम्मीद है?
जीएसटी दरों में कटौती और त्योहारी सीजन के दौरान बढ़ी खपत ने भारतीय अर्थव्यवस्था को जो रफ्तार दी है, वह भविष्य के लिए एक शुभ संकेत है। एक तरफ जहां शुक्रवार को शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई और सेंसेक्स 961 अंक टूट गया, वहीं दूसरी ओर वृहद आर्थिक मोर्चे पर 7.8% की यह दमदार जीडीपी ग्रोथ निवेशकों और नीति निमार्ताओं को यह भरोसा दिलाती है कि भारत की विकास गाथा पूरी तरह से सुरक्षित और मजबूत ट्रैक पर है।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button