गाजियाबाद

अजंता फैक्ट्री की जहरीली हवा से परेशान ग्रामीण

अगरौला और आसपास के गांवों में कैंसर सहित गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी/अगरौला :  क्षेत्र में बेतरतीब तरीके से संचालित हो रहे उद्योगों ने ग्रामीणों का जीवन संकट में डाल दिया है। अगरौला गांव सहित आसपास बसे कई गांवों में अजंता फैक्ट्री से निकल रहे जहरीले धुएं और प्रदूषित पानी के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री का धुआं कैंसर जैसी घातक बीमारी का एक बड़ा कारण बन चुका है।
स्थानीय लोगों के अनुसार फैक्ट्री की चिमनियों से लगातार उठने वाला काला धुआं वातावरण में फैल कर हवा को जहरीला बना रहा है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं में सांस की बीमारियाँ, त्वचा रोग, एलर्जी, फेफड़ों के इन्फेक्शन और कैंसर जैसी समस्या बढ़ती जा रही है। वहीं फैक्ट्री से निकलने वाला रासायनिक कचरा भूजल को भी प्रदूषित कर रहा है, जिसके परिणामस्वरूप पीने के पानी की गुणवत्ता तेजी से खराब हो रही है।
 प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि:
लोनी पुलिस, नगरपालिका परिषद, प्रदूषण नियंत्रण विभागग,को इस समस्या की
जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई सम्बंधित इकाई के खिलाफ सख़्त कार्रवाई नहीं की गई है। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और विभाग मात्र औपचारिकता निभा रहे हैं।
स्थानीय निवासी सतेन्द्र गुर्जर का कहना है:
> “हमारे गांव में बीमारी फैल रही है, बच्चे बीमार हैं, बुजुर्ग परेशान हैं, लेकिन प्रशासन आंखें बंद करके बैठा है। शिकायत करने पर धमकाया जा रहा है और झूठे मुकदमों में फंसाने की बात कही जा रही है।”
कई परिवारों में कैंसर की दस्तक
ग्रामीणों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों में कैंसर के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। कई लोग इलाज पर लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद जिंदगी की जंग हार चुके हैं, जिससे गांवों में भय, आक्रोश और असहायता की भावना बढ़ती जा रही है
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
नागरिकों ने सरकार और संबंधित विभागों से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्री को तुरंत बंद कराया जाए
 वातावरण और पानी की विस्तृत जांच हो
बीमारी प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता और इलाज मुहैया कराया जाए
 फैक्ट्री मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई हो
जनता की अपील — “यह लड़ाई सिर्फ हमारी नहीं”
अगरौला और आसपास के निवासियों ने सभी सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों से आवाज उठाने की अपील की है।
उनका कहना है:
> “यह लड़ाई किसी व्यक्ति की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व की है। हमें धन नहीं — जागरूकता, समर्थन और न्याय चाहिए।”
चेतावनी: हालात जल्द न सुधरे तो संकट और गहराएगा
अगर समय रहते इस प्रदूषण को रोका नहीं गया, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र गंभीर जन–स्वास्थ्य आपदा से गुजर सकता है। प्रशासन की उदासीनता और औद्योगिक प्रदूषण का यह गठजोड़ ग्रामीणों के जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण पर सीधा खतरा बन गया है।
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button