नपाध्यक्ष उप चुनाव में राजनैतिक दलों का अंकगणित
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। नगर पालिका परिषद के उप चुनाव की रणभेरी बजते ही राजनैतिक दलों की गतिविधियां बढ़ गयीं हैं। गत दिवस सत्तादल भाजपा की प्रत्याशी सोनाली जैन का नामाकंन दाखिल कराने के लिए प्रभारी मंत्री दानिश आजाद अंसारी, सांसद अनुराग शर्मा, राज्यमंत्री मनोहरलाल व विधायक रामरतन कुशवाहा को मैदान में आना पड़ा तो वहीं उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी व कांग्रेस की गठबंधन प्रत्याशी नीलम चौबे का नामाकंन दाखिल कराने के लिए पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, जिला प्रभारी कुं.मुकुट सिंह समेत भारी संख्या में शीर्ष नेता मौजूद रहे। वहीं निर्दलीय प्रत्याशियों के रूप में सपा के पुराने कार्यकर्ता रामदास श्रोतीय की धर्मपत्नी अनुपमा श्रोती, कांग्रेस से निष्कासित नेता हरीबाबू शर्मा की धर्मपत्नी अरूणा शर्मा, नाजरीन, आम आदमी पार्टी की महिला नेता मीना राजा और लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास) समर्थित प्रत्याशी सूबी संजय जैन चिगलौआ ने भी अपना-अपना नामाकंन पत्र दाखिल किया है। हालांकि अब प्रचार-प्रसार के लिए दशहरा तक का इंतजार किया जा रहा है। इसके पहले प्रत्याशी, उसके परिजन, शुभचिंतक और समर्थक अलग-अलग स्थानों पर जाकर चर्चाओं का माहौल बना रहे हैं।
क्या कहते हैं भाजपा के समीकरण
नपा अध्यक्ष पद के लिए संचालित चुनाव को लेकर तमाम प्रकार के समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं। शहर के चौक-चौराहों पर मुख्य राजनैतिक दलों के प्रत्याशियों को लेकर खूब चर्चाओं का दौर खिंच रहा है। देर रात तक लोगों की चौपालों में उप चुनाव को लेकर ही वार्ता होती नजर आती है। आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो भाजपा प्रत्याशी जैन समुदाय से आती हैं और इसी जैन समाज से लोक जन शक्ति पार्टी (रामविलास) समर्थित प्रत्याशी सूबी संजय जैन चिगलौआ ने भी अपना नामाकंन पत्र दाखिल किया है। जैन समुदाय से दो प्रत्याशियों के मैदान में होने से चुनाव कड़ा तो नहीं, लेकिन हां कुछ फर्क तो पड़ेगा।
सपा कांग्रेस गठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में नजर आ रहे ब्राह्मण समाज के लोग
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन की प्रत्याशी नीलम चौबे के समर्थन में अन्य समाज के लोगों के साथ-साथ ब्राह्मण समाज के लोग नजर आ रहे हैं। लोग तो यहां तक कहने से नहीं चूक रहे हैं कि जिस प्रकार से बिहार में एलओपी राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा निकाली गयी, उससे काफी हद तक गठबंधन प्रत्याशी को मदद मिलेगी। अब देखना होगा कि चुनाव ऊंट किस करवट बैठता है।
कड़ी टक्कर दे सकते हैं निर्दलीय प्रत्याशी
वैसे तो किसी भी चुनाव में अपना पक्ष रखने और पार्टी की नीतियों का सही या गलत का आंकलन करते हुये विरोध या समर्थन करने का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा माना जाता है। इसी के तहत वर्तमान में सत्तादल और मुख्य विपक्षी दलों के प्रत्याशियों को चुनावी समर में कूदी निर्दलीय महिला प्रत्याशी भी कड़ी टक्कर में नजर आ रहे हैं। इनमें अधिकांश निर्दलीय प्रत्याशी किसी न किसी राजनैतिक दल से ताल्लुक रखती हैं, जिनका फायदा उठाने का पूरा-पूरा कार्य किये जाने की संभावनाएं बलवती नजर आ रहीं हैं।
यह हैं चुनाव प्रक्रियाएं
अध्यक्ष नगर पालिका परिषद उप निर्वाचन के लिए अधिसूचना जारी हो चुकी है, जिसके अंतर्गत 19 से 29 सितंबर तक नाम निर्देशन पत्रों की प्राप्ति, 30 सितंबर को नाम निर्देशन पत्रों की समीक्षा, 03 अक्तूबर को नाम वापसी, 06 अक्तूबर को प्रतीक आवंटन, 15 अक्तूबर को मतदान एवं 17 अक्तूबर को मतगणना निर्धारित है।



