गोड्डा

चतुर्थ राजकीय गणतंत्र महोत्सव के समापन समारोह को लेकर समीक्षात्मक बैठक आयोजित 

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा। समाहरणालय स्थित सभागार में चतुर्थ राजकीय गणतंत्र मेला महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर की जाने वाली तैयारियों के संबंध में संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक के दौरान उपायुक्त द्वारा कॉफी टेबल बुक की तैयारी, सेमिनार आयोजन, टेंट एवं पंडाल प्रबंधन, वाहन व्यवस्था, संभावित अतिथियों के आगमन की तैयारी, समारोह स्थल की साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था, डिजिटल संदेश प्रसारण तथा कार्यक्रम के लाइव प्रसारण आदि बिंदुओं की क्रमवार समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने जानकारी दी कि आगामी 29 एवं 30 मार्च को चतुर्थ राजकीय गणतंत्र मेला महोत्सव के समापन समारोह के अवसर पर गोड्डा के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि चतुर्थ गणतंत्र मेला महोत्सव जिले की सांस्कृतिक विरासत, कला एवं परंपराओं को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
दौरान पुलिस अधीक्षक द्वारा बताया गया कि उक्त कार्यक्रम में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए जाएंगे। महत्वपूर्ण स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती, सीसीटीवी निगरानी, ट्रैफिक प्रबंधन एवं भीड़ नियंत्रण हेतु विशेष व्यवस्था की जा रही है। बैठक में डीसी अंजली यादव, एसपी मुकेश कुमार, उप विकास आयुक्त दीपक कुमार दूबे, अनुमंडल पदाधिकारी वैद्यनाथ उरांव, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अशोक प्रियदर्शी, जिला योजना पदाधिकारी फैजान सरवर, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी अरविंद प्रसाद अग्रवाल आदि पदाधिकारी उपस्थित थे।
नये पूराने प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए नहीं होती प्रोटोकॉल के हिसाब से व्यवस्था
हर बार की तरह इस बार भी मीडिया सेक्टर के लिए जिला प्रशासन की ओर से शायद विशेष तवजों का ध्यान नहीं दिया जा रहा है। क्योंकि पिछले तीन महोत्सव में प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए प्रोटोकॉल के हिसाब से व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती है। इस वजह से मेन स्ट्रीम के मीडिया के पत्रकार बंधु महोत्सव के अभिन्न अंग नहीं बन पाते हैं।
कभी सोशल मीडिया को दरकिनार करती है प्रशासन, तो कभी सोशल मीडिया का बैठक में होता है चर्चा
इलेक्शन एवं महत्वपूर्ण समय में सोशल मीडिया को लेकर जिला प्रशासन काफी रेस रहती है। मोटे तौर पर कहे तो जिला प्रशासन की ओर से सोशल मीडिया को दरकिनार किया जाता है। फिर जब जिला प्रशासन को टीआरपी बढ़ाना रहता है तो संबंधित आयोजन में सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर चर्चा की जाती है। इतना ही नहीं मौसम में सोशल मीडिया को तर्जी देकर जगह दिया जाता है। वही, प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रमुख पत्रकारों को नजर अंदाज करने का काम जिला प्रशासन करती है। पत्रकारों ने डीसी एसपी एवं जिला जनसंपर्क पदाधिकारी से वैसे सभी नए एवं पुराने प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकारों को ससम्मान महोत्सव के मंच पर सम्मानित करने तथा मंच के समक्ष अधिकारियों के लाइन में बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
समारोह स्थल के मुख्य द्वार पर पुलिस वाले समिचिन मीडिया को हाथ दिखा रोकते टोकते
पत्रकारों ने बताया कि प्रथम द्वितीय एवं तृतीय महोत्सव के दौरान समारोह स्थल के मुख्य द्वार पर पुलिस वाले समिचिन पत्रकारों को हाथ दिखाकर रोकते और टोकते है। ऐसा लगता है कि पत्रकारों का वहां पर पहुंचना उन्हें ठीक नहीं लगता है। चतुर्थ महोत्सव के बैठक में जिले के पुलिस कप्तान सुरक्षा व्यवस्था और ब्रैकेटिंग आदि पर फोकस कर रहे हैं। मगर उनकी सूची में पत्रकारों को मुख्य द्वार से समारोह स्थल तक पहुंचने में किसी होनहार पुलिस वाले की प्रतिनियुक्ति की बात नहीं की जा रही है। कहीं ऐसा ना हो कि पिछले महोत्सव की तरह चतुर्थ महोत्सव में भी समिचिन नये एंव पूराने पत्रकारों का वर्ग कार्यक्रम में अपने को असम्मानित महसूस किए बगैर कार्यक्रम में शामिल हुए वापस लौट जाए।
मंत्री विधायक एवं सांसद को ऐसे कार्यक्रम में पत्रकारों के नजर अंदाज का मसला नहीं दिखता
पत्रकारों ने यह भी बताया कि प्रशासन की ओर से ऐसा इसलिए हो पता है कि जिले के सांसद मंत्री विधायक एवं बड़े जनप्रतिनिधियों को पत्रकारों के नजर अंदाज करने का मसला दिखाई नहीं देता है। इसलिए तो उन्हें अपने प्रोटोकॉल को देखने और प्रशासन के जी-हजूरी के सामने कुछ नजर नहीं आता है।
छोटे-छोटे नेता को पुलिस वाले कुर्सी तक पहुंचा कर बैठाते
पत्रकारों ने बताया कि पहले दूसरे एवं तीसरे महोत्सव में छोटे-छोटे नेताओं को कुर्सी तक  पहुंच कर बैठाते हुए पुलिस वालों को देखा गया है। हंस हंस कर गंतव्य स्थान तक पहुंचाते हैं जैसे लगता है कि उनके रिश्तेदार ही समारोह स्थल पर पहुंच गए है। उल्लेखनीय की पत्रकारों की ओर से उपरोक्त सभी बातें प्रशासन को महोत्सव में होने वाले खामियों के तहत दी गई है। इसके बावजूद प्रशासन चाहे तो सीधे तौर पर चतुर्थ राजकीय गणतंत्र मेला महोत्सव के समापन समारोह में पत्रकारों के उपस्थिति पर पूर्णत: विराम लगा सकती है। इससे ना तो कोई आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन होगा और ना ही जिला प्रशासन को महोत्सव में कवरेज की प्रशासन को आवश्यकता होगी।
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