गोड्डा

महागामा में कहर बनी आंधी-बारिश

कच्चा घर ढहने से गरीब मजदूर की मौत, जटामा बस्ती में मातम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
महागामा। महागामा प्रखंड के नयागर पंचायत अंतर्गत जटामा बस्ती में बीती रात प्रकृति का कहर एक गरीब परिवार पर भारी पड़ गया। तेज आंधी, मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने ऐसी तबाही मचाई कि एक मेहनतकश मजदूर की जान चली गई। मृतक की पहचान भिखारे मांझी के रूप में हुई है।जानकारी के अनुसार, रात करीब डेढ़ से दो बजे के बीच अचानक मौसम ने विकराल रूप धारण कर लिया। तेज हवाओं के साथ बारिश और ओलावृष्टि शुरू हो गई। इसी दौरान भिखारे मांझी का कच्चा पुवाल और छप्पर से बना घर तेज तूफान की मार नहीं झेल सका और देखते ही देखते ढह गया। घर गिरने से वह गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई।घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पूरे जटामा बस्ती में शोक की लहर फैल गई है। ग्रामीणों के अनुसार, भिखारे मांझी बेहद गरीब थे और दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में एक बेटा है, जिसकी शादी हो चुकी है, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है।
ग्रामीणों में आक्रोश
प्रशासन से मदद की मांग घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि गरीब और असहाय परिवारों के लिए सरकार की योजनाएं कागजों तक ही सीमित हैं। यदि समय रहते पक्का मकान मिला होता, तो शायद आज भिखारे मांझी जिंदा होते। ग्रामीणों ने प्रशासन से मृतक के परिजनों को तत्काल मुआवजा, आपदा राहत और आवास योजना के तहत पक्का घर देने की मांग की है।प्राकृतिक आपदा ने फिर खोली व्यवस्था की पोल यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई परिवार कच्चे और जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। हर साल आंधी-तूफान और बारिश के दौरान ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो पाया है।
अब सवाल उठता है
क्या हर बार एक गरीब की जान जाने के बाद ही प्रशासन जागेगा? या फिर इस बार पीड़ित परिवार को समय पर न्याय और सहारा मिल पाएगा।
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