बालाघाट

नाट्य कला और संस्कृति से जुड़े कलाकारों पर मॅडराया जीवन आर्थिक संकट

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : नाट्य कला और संस्कृति से जुड़े कलाकारों का जीवन संकट में है जिनकी कला को निहारने व वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को कायम रखने के लिए जिले के कलाकारों को मजदूरी कर अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है वहीं अन्य राज्यों की तरह इन कलाकारों को शासन द्वारा शासकीय योजना व पेंशन आदि का लाभ नहीं दिया जा रहा है जिसके चलते कला क्षेत्र से जुड़े कलाकार प्रदेश शासन ने नाराज है।जिनकी यह नाराजगी रविवार को नगर के नूतन कला निकेतन में आयोजित महाकौशल कलाकार शायर मंडल स्थापना दिवस कार्यक्रम में देखने को मिली। जिसमें नाट्य कला और संस्कृति से जुड़े शायर ,गीतकार, डंढार कलाकारो ने संगठन के माध्यम से उनकी विभिन्न मंडलियों और इस क्षेत्र से जुड़े कलाकारों को छग महाराष्ट्र राज्य की तर्ज पर शासकीय योजनाओं का लाभ देने, कलाकारों और उनके सहयोगियों को व्यक्तिगत पेंशन दिए जाने सहित सांस्कृतिक कला विभाग के माध्यम से बड़े शहरों में उनकी कला का प्रदर्शन कराए जाने की मांग की।आयोजित इस स्थापना दिवस के अवसर पर मप्र महाकौशल और गोंदिया महाराष्ट्र से आए कलाकारों ने स्थापना दिवस पर बेठक के उपरांत गीत संगीत गायन वादन आदि कलाओं की प्रस्तुति देकर हर किसी को मनमुग्ध कर दिया।महाकौशल कलाकार शायर मंडल अध्यक्ष गौरीशंकर मोहारे के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में गोंदिया महाराष्ट्र, बालाघाट, सिवनी, जबलपुर, गोंदिया, डिंडोरी, व महाकौशल के विभिन्न जिलों से आए शायर ,डंढार कलाकार ,गायक सहित अन्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
 संगठन स्थापना के 6 वर्ष पूरे अब तक पूरी नही हुई एक भी मांग
स्थापना दिवस पर आयोजित इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के पूर्व संगठन की एक बैठक का आयोजन किया गया आयोजित इस बैठक व सम्मेलन में सर्व सहमति से मानदेय की प्रमुख मांग को शासन प्रशासन तक पहुंचाने की सहमति बनी।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने समाज में बढ़ती चुनौतियों, युवाओं की भूमिका और सामाजिक एकता पर अपने विचार साझा किए।वक्ताओं ने कहा कि समाज की मजबूती के लिए शिक्षा, संस्कार और आपसी सहयोग बेहद ज़रूरी है।अगर समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाना है तो हमें मिलकर काम करना होगा और युवाओं को आगे लाना होगा।”कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने वक्ताओं की बातों से सहमति जताई और समाजहित में सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया। वही आयोजित इस कार्यक्रम में अध्यक्ष मोहारे के नेतृत्व में इन कलाकारों ने अपनी आवाज को बुलंद करने का संकल्प लिया। तो वहीं उन्होंने उनके नेतृत्व में कलाकारों की मानदेय वाली प्रमुख मांग को शासन प्रशासन तक पहुंचाने की बात कही।जहां देर शाम तक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम व सामुहिक भोज के बाद कार्यक्रम का शांतिपूर्ण माहौल में समापन किया गया।
 ना मानदेय मिल रहा है, ना योजनाओं का लाभ-गौरीशंकर मोहारे 
चर्चा के दौरान ग्राम खैरी डंढार मंडली अध्यक्ष व कलाकार शायर मंडल महाकौशल अध्यक्ष गौरी शंकर मोहरे ने बताया कि आज संगठन का स्थापना दिवस व बैठक का आयोजन किया गया है जिसमें सभी ने मिलकर छग.महाराष्ट्र राज्य की तर्ज पर विभिन्न मंडलियों को शासन की योजनाओं का लाभ देने, शायरों को व्यक्तिगत रुप से पेंशन दिए जाने और लोक नृत्य कला को सांस्कृतिक कला विभाग के माध्यम से भोपाल दिल्ली तक पहुंचाने की मांग की गई है।हमारी मांग है कि इस क्षेत्र से जुड़े सभी संगठनों और कलाकारों को शासन से अनुदान मिले, ताकि यह कला आगे भी बढ़ते रहें और इस कला से जुड़े लोगों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना ना पड़े। उन्होंने बताया कि हम कलाकारों द्वारा शासन प्रशासन की विभिन्न योजनाओं का गांव गांव प्रचार प्रसार किया जाता है स्वच्छता अभियान, बेटी पढ़ाओ- बेटी बचाओ, पढ़ाई के क्षेत्र, जल जीवन मिशन सहित शासन की अन्य जानकारी से लोगों को अवगत कराया जाता है।यहां तक की शासन प्रशासन के कोई भी प्रोग्राम बिना कलाकारों के संपन्न नहीं होते, बावजूद इसके भी हर वक्त हम लोगों की उपेक्षा की जा रही है।आज तक शासन द्वारा कलाकारों को किसी भी शासकीय योजना का लाभ नहीं दिया गया है जिसके चलते संगठन द्वारा यह मांग की जा रही है।
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