बेतुल

बैतूल पट्टे के नाम पर करोड़ों का खेल, रसूखदारों के कब्जे में सरकारी जमीन

शासकीय जमीन पर प्लाटिंग कर बाहरी लोगों को बेचे प्लॉट

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
बैतूल। आमला तहसील के ग्राम हरण्या में शासकीय जमीन पर अवैध प्लाटिंग के मामले में प्रशासनिक कार्रवाई ठंडी पड़ती नजर आ रही है। एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया के निर्देश पर नायब तहसीलदार द्वारा सात दिन में अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए जाने के बाद भी अब तक जमीन से कब्जा नहीं हटाया गया है। इससे पूरे मामले में राजनीतिक दबाव और रसूखदारों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार जिस जमीन पर अवैध प्लाटिंग की गई है, उसके आसपास की भूमि की कीमत 2500 से 3000 रुपए प्रति स्क्वायर फीट तक है। इसी का फायदा उठाकर शासकीय पहाड़ी चट्टान मद की पूरी जमीन को प्लॉट में तब्दील कर दिया गया और पट्टे के नाम पर करोड़ों रुपए की कमाई का जरिया बना लिया गया। आरोप है कि जिन लोगों ने प्लॉट काटे या खरीदे हैं, उनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं जो सरकारी पदों पर पदस्थ हैं, आर्थिक रूप से संपन्न और प्रभावशाली हैं। इतना ही नहीं, पंचायत क्षेत्र के बाहर के लोगों को भी प्लॉट बेचे जाने की बात सामने आई है।
मौजा हरण्या की खसरा नंबर 47 की इस शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि राजस्व अमले की जांच में पहले ही हो चुकी है और भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्रवाई भी दर्ज की गई थी। इसके बावजूद मौके पर न तो प्लॉट हटाए गए और न ही किसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई है, जिससे प्रशासन की मंशा पर भी सवाल उठने लगे हैं।
समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिला सचिव भूपेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस शासकीय जमीन का लाभ गरीबों को मिलना चाहिए था, वह धनवान और रसूखदार लोगों के कब्जे में पहुंच गई है। उन्होंने अवैध प्लाटिंग करने वालों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है।
मुरली यदुवंशी, संतोष यदुवंशी, दीपक यदुवंशी, श्याम यादव सहित अन्य ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे आंदोलन करेंगे और जरूरत पड़ी तो भूख हड़ताल भी शुरू की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि अब कार्रवाई में और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और शासकीय जमीन को हर हाल में मुक्त कराया जाएगा।
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