असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा का अभिषेक मनु सिंघवी पर पलटवार
बोले- ‘मुझे लोकतंत्र का पाठ न पढ़ाएं’।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार, 1 मई को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी पर तीखा हमला बोला। यह जवाब पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा से जुड़ी विवादित टिप्पणी और उस पर जारी राजनीतिक बहस के बीच आया है। मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उन्हें “लोकतंत्र, सार्वजनिक विमर्श या शिष्टाचार” पर किसी से भी पाठ पढ़ने की जरूरत नहीं है। एक्स पर किए गए पोस्ट में सरमा ने लिखा, “मुझे लोकतंत्र, सार्वजनिक विमर्श या शिष्टाचार पर किसी से भी, खासकर ए.एम. सिंघवी से, कोई सबक नहीं चाहिए। शिष्टाचार और उनके साथ एक कमरे में रहना कभी संभव नहीं।” उन्होंने कहा कि असली मुद्दा राजनीतिक बहस नहीं, बल्कि एक निजी व्यक्ति को निशाना बनाए जाने का है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि एक ऐसी महिला, जिसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है, उसे राष्ट्रीय टेलीविजन पर बदनाम किया गया। उन्होंने कहा कि इसके लिए “दूसरे देशों के फर्जी दस्तावेजों” का इस्तेमाल किया गया। सरमा ने यह भी दावा किया कि अदालतें इस मामले का संज्ञान लेंगी और दोषियों को सजा मिलेगी।उन्होंने लिखा, “मुझे विश्वास है कि अदालतें इस पर जल्द या देर से ध्यान देंगी और जो व्यक्ति फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर एक महिला की छवि खराब करने तथा चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था, उसे दंडित किया जाएगा।”सरमा ने सिंघवी पर सीधा संवाद से बचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों पर टिप्पणी करना आसान है, जहां वह जवाब देने के लिए मौजूद नहीं होते। मुख्यमंत्री के अनुसार, “यह बहस नहीं, बल्कि उस निष्पक्ष संवाद से बचना है, जिसकी आप वकालत करते रहे हैं।” अपने बयान के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने लिखा, “और मैं साफ कर दूं, यह सिर्फ शुरुआत है, अंत नहीं। सत्यमेव जयते।”यह प्रतिक्रिया सिंघवी की उस आलोचना के बाद आई, जिसमें उन्होंने सरमा के रुख पर सवाल उठाए थे और सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणियों का हवाला दिया था। सिंघवी ने कहा था कि विवाद से जुड़े कुछ सार्वजनिक बयान अनुचित थे और उन्होंने लोकतांत्रिक मानकों को कमजोर किया।उन्होंने लोकतंत्र में असहमति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा की भी बात कही। यह ताजा बयानबाजी उस समय सामने आई है, जब सुप्रीम कोर्ट ने पवन खेड़ा को अस्थायी जमानत दी है। मामला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा पर कथित टिप्पणी से जुड़ा है। न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने पहले फैसला सुरक्षित रखने के बाद शर्तों के साथ राहत दी।



