गोड्डा

जनगणना 2026 में OBC कॉलम गायब होने पर भड़के विधायक प्रदीप यादव 

केंद्र सरकार पर साधा निशाना

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गोड्डा : विधायक प्रदीप यादव ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वर्तमान जनगणना के पहले चरण में जो 33 बिंदुओं की सूची तैयार की गई है, उसमें ओबीसी (OBC) समुदाय के साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से फॉर्म के बिंदु संख्या 12 का जिक्र किया, जिसमें परिवार के मुखिया की श्रेणी पूछी गई है। विधायक का कहना है कि इसमें अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के विकल्प तो दिए गए हैं, लेकिन पिछड़ी जातियों के लिए कोई स्पष्ट कॉलम न रखकर उन्हें ‘अन्य’ की श्रेणी में डाल दिया गया है। यह ओबीसी वर्ग की वास्तविक संख्या और स्थिति को छुपाने की एक साजिश प्रतीत होती है।
​जाति जनगणना: समाज का ‘एक्स-रे’
जाति आधारित जनगणना की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने इसे समाज का ‘एक्स-रे’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि आजादी के 75 वर्षों के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि विकास का लाभ किस जाति को कितना मिला। प्रदीप यादव के अनुसार, जब तक जातियों का सटीक डेटा सामने नहीं आएगा, तब तक पिछड़ी और वंचित जातियों के लिए सही नीतियां और बजट आवंटित करना संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस मांग से पीछे हटती है, तो राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पूरे देश में व्यापक आंदोलन छेड़ेगी।
​वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विधायक ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विपक्षी समर्थकों, विशेषकर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने का प्रयास कर रही है। झारखंड में इसे रोकने के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी तरह सतर्क है और एक-एक बूथ पर बीएलओ-2 (BLO-2) के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे हर प्रखंड में सक्रिय रहकर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी गरीब या लक्षित वर्ग का नाम मतदाता सूची से गायब न हो।
महंगाई और बुनियादी समस्याओं पर प्रहार
अंत में उन्होंने देश में बढ़ती महंगाई, विशेषकर पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों में हुई भारी वृद्धि पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार जरूरी सूचनाएं साझा करने में मुंह चुरा रही है और दूसरी तरफ आम जनता पर महंगाई का बोझ लाद रही है। ‘तेल की किल्लत’ और गैस के बढ़ते दामों ने मध्यम और निम्न वर्ग की कमर तोड़ दी है, जिससे जनता में भारी असंतोष है।
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