बेतुल
बैतूल एमराल्ड हाइट्स रेजिडेंस,, के बड़े-बड़े दावों पर उठ रहे सवाल
जनता पूछ रही - क्या ये सिर्फ कागज़ी चमक है?

(लक्ज़री के नाम पर महंगे फ्लैट्स, दुकानें बेचने की तैयारी, लेकिन बुनियादी सुविधाओं पर चुप्पी)
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। कोठी बाजार में बन रहे एमराल्ड हाइट्स एंड रेसिडेंसेस प्रोजेक्ट को लेकर जितना शोर मचाया जा रहा है, ज़मीनी हकीकत उतनी ही धुंधली दिख रही है। एसएसएन अन्नपूर्णा हाइट्स एलएलपी द्वारा ‘आधुनिक जीवनशैली’ और ‘प्रीमियम सुविधाओं’ के नाम पर प्रचारित इस प्रोजेक्ट को कई लोग सिर्फ एक और महंगा रियल एस्टेट जुमला बता रहे हैं।
‘आरामदायक जीवन’ का दावा, पर कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर
“आरामदायक जीवन के लिए डिज़ाइन किया गया” जैसे नारे दिए जा रहे हैं, लेकिन प्रोजेक्ट के रेट बैतूल जैसे छोटे शहर के मध्यमवर्गीय परिवारों की क्षमता से कहीं ज़्यादा बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डर बड़े शहरों की टाउनशिप का सपना दिखाकर सिर्फ फ्लैट्स महंगे दामों पर बेचना चाहता है।
प्रीमियम अनुभव या सिर्फ मार्केटिंग का खेल?
बहुमंजिला फ्लैट्स में ‘प्राकृतिक रोशनी’ और ‘वेंटिलेशन’ जैसे बेसिक बिंदुओं को भी बड़ी उपलब्धि बताकर बेचा जा रहा है। हरियाली और वॉकिंग एरिया के नाम पर जो तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, वे कम्प्यूटर जनरेटेड हैं। हकीकत में कोठी बाजार जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में खुली जगह और शांति मिल पाएगी, इस पर संदेह है।
क्लब हाउस के नाम पर अतिरिक्त बोझ
“जीवनशैली को नई पहचान देने वाले क्लब हाउस” की बात हो रही है, लेकिन मेंटेनेंस चार्ज और क्लब की महंगी मेंबरशिप का बोझ अंततः फ्लैट खरीदारों पर ही पड़ेगा। शहर में पहले से आधे-अधूरे पड़े क्लब हाउस इस बात के गवाह हैं कि बिक्री के बाद इन सुविधाओं की हालत खस्ता हो जाती है।
बच्चों-बुजुर्गों के नाम पर भावनात्मक मार्केटिंग
बाल खेल क्षेत्र, स्केटिंग रिंग, सीनियर सिटीजन कॉर्नर जैसी बातें करके परिवारों को लुभाने की कोशिश की जा रही है। रियल एस्टेट जानकारों का कहना है कि ये सुविधाएं अक्सर ब्रोशर तक ही सीमित रहती हैं। बाद में जगह की कमी बताकर इन्हें या तो बंद कर दिया जाता है या स्टोर रूम बना दिया जाता है।
“परिवार साथ बढ़ेंगे” या ट्रैफिक जाम में फंसेंगे?
कोठी बाजार पहले से ही बैतूल का सबसे व्यस्त इलाका है। ऐसे में यहां सैकड़ों फ्लैट्स, दुकानें और ऑफिस बनने से ट्रैफिक, पार्किंग और पानी की समस्या और विकराल हो जाएगी। ‘व्यवसायिक हब’ बनाने के चक्कर में आसपास रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ना तय है।
निवेशकों के लिए जोखिम, खरीदारों के लिए धोखा?
‘निवेश का बेहतर विकल्प’ बताकर लोगों को लुभाया जा रहा है, मगर बैतूल में पहले भी कई प्रोजेक्ट तय समय पर पूरे नहीं हुए। रेरा नंबर होने से पारदर्शिता का दावा किया जा रहा है, लेकिन रेरा के बावजूद खरीदारों को पजेशन में देरी और वादे से मुकरने की शिकायतें आम हैं।
बुकिंग शुरू, लेकिन भरोसा अधूरा
कंपनी बुकिंग के लिए साइट विजिट का न्योता दे रही है, पर स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब तक बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर – सड़क, सीवर, पानी की सप्लाई – की गारंटी नहीं, तब तक सिर्फ 3D तस्वीरों के भरोसे लाखों का निवेश क्यों करें?
शहर की पहचान बदलेगी या समस्या बढ़ेगी?
दावा किया जा रहा है कि ये प्रोजेक्ट बैतूल का लैंडमार्क बनेगा। मगर विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि बिना प्लानिंग के बने ऐसे ‘प्रीमियम प्रोजेक्ट’ अक्सर शहर पर बोझ बन जाते हैं। चमक-दमक वाले ब्रोशर से इतर, असली सवाल ये है कि क्या बैतूल को वाकई इसकी जरूरत है, या ये सिर्फ बिल्डर का मुनाफा बढ़ाने का जरिया?



