गाजियाबाद

 शराब फैक्ट्रियों के ‘कुट्टा’ को पशुओं को खिलाने से पहले बरतें सावधानी

पशुपालन विभाग ने जारी की एडवाइजरी

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद :  शराब एवं एथेनॉल निर्माण इकाइयों से निकलने वाले अवशेष, जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘कुट्टा’ कहा जाता है, को पशुओं के आहार के रूप में इस्तेमाल करने को लेकर पशुपालन विभाग ने पशुपालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। विभाग का कहना है कि बिना गुणवत्ता जांच और विशेषज्ञ की सलाह के ऐसे अवशेष पशुओं को खिलाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
पशुपालन विभाग के अनुसार मक्का, टूटे चावल अथवा अन्य अनाज से एथेनॉल तैयार करने के दौरान निकलने वाला अवशेष एक उप-उत्पाद होता है। यदि यह निर्धारित गुणवत्ता वाला हो और वैज्ञानिक तरीके से पशु आहार में शामिल किया जाए तो सीमित मात्रा में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि खुले में रखा, सड़ा-गला, दुर्गंधयुक्त, फफूंद लगा या संदिग्ध गुणवत्ता वाला कुट्टा पशुओं के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
विभाग के मुताबिक खराब गुणवत्ता का कुट्टा खाने से पशुओं में भूख कम होना, जुगाली बंद होना, दस्त, पेट फूलना, एसिडोसिस, दूध उत्पादन में कमी के साथ यकृत और गुर्दे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। गंभीर स्थिति में गर्भित पशुओं के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ने के साथ पशु की मौत तक हो सकती है।
विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि अज्ञात स्रोत या बिना गुणवत्ता परीक्षण वाले कुट्टे का इस्तेमाल न करें। सड़ा, फफूंदयुक्त, अत्यधिक खट्टा, दुर्गंधयुक्त अथवा गर्म कुट्टा किसी भी स्थिति में पशुओं को न खिलाया जाए। यदि गुणवत्तापूर्ण डिस्टिलरी उप-उत्पाद का उपयोग किया जा रहा है तो उसे संतुलित पशु आहार, हरे एवं सूखे चारे के साथ पशु चिकित्सक की सलाह के अनुसार सीमित मात्रा में ही दिया जाए।
उच्च गुणवत्ता वाले सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGS) की मात्रा सामान्यतः बड़े दुधारू पशुओं में करीब 1 से 2 किलोग्राम प्रतिदिन तथा गीले डिस्टिलर्स ग्रेन्स (WDG) की मात्रा करीब 5 से 10 किलोग्राम प्रतिदिन तक रखी जा सकती है। हालांकि वास्तविक मात्रा पशु के वजन, दूध उत्पादन और उसके संपूर्ण आहार पर निर्भर करती है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि कुल आहार के शुष्क पदार्थ के आधार पर डिस्टिलरी उप-उत्पाद की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
पशुपालन विभाग ने यह भी कहा है कि पहली बार कुट्टा देने पर मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाई जाए और इसे अकेले पशु को न खिलाया जाए। गर्भित, बीमार अथवा कमजोर पशुओं के मामले में बिना पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग न किया जाए।
विभाग ने पशुपालकों से अपील की है कि केवल सस्ता होने के कारण किसी भी औद्योगिक अवशेष को पशु आहार न बनाएं। यदि कुट्टा खिलाने के बाद पशु में जुगाली बंद होना, पेट फूलना, सुस्ती, चलने में परेशानी, दूध उत्पादन में अचानक कमी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय अथवा पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
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