बाराबंकी
टीबी मुक्त भारत अभियान में युवाओं ने संभाली जागरूकता की कमान
बड़ागांव सीएचसी में अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम का दूसरा दिन

20 माय भारत वालंटियर्स को टीबी जांच, उपचार और बचाव की दी गई व्यावहारिक जानकारी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बाराबंकी। टीबी मुक्त भारत अभियान को जन-जन तक पहुंचाने और युवाओं को स्वास्थ्य जागरूकता का प्रभावी दूत बनाने के उद्देश्य से युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार के ‘मेरा युवा भारत’ (माय भारत) तथा स्वास्थ्य विभाग के टीबी सेल के संयुक्त तत्वावधान में चलाए जा रहे अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम (ELP) के दूसरे दिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव में युवाओं को क्षय रोग के प्रति विस्तृत एवं व्यावहारिक जानकारी दी गई।
18 से 22 अगस्त 2026 तक चलने वाले इस विशेष अभियान के तहत बुधवार को ब्लॉक मसौली के चयनित ग्राम इचौलिया, ज्योरी और नियामतपुर से आए लगभग 20 माय भारत वालंटियर्स ने सहभागिता की। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को टीबी के प्रति प्रशिक्षित कर उन्हें अपने-अपने गांवों और समुदायों में जागरूकता फैलाने के लिए तैयार करना है, ताकि टीबी के संदिग्ध मरीजों की समय से पहचान, जांच और उपचार सुनिश्चित कराया जा सके।
कार्यक्रम की शुरुआत टीबी सभागार कार्यालय परिसर में हुई। इस दौरान सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बड़ागांव के अधीक्षक डॉ. राधेश्याम गौड़ के मार्गदर्शन में युवाओं को टीबी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को बताया गया कि टीबी के प्रमुख कारण क्या हैं, इसके सामान्य लक्षणों की पहचान कैसे की जाए, संक्रमण से बचाव के लिए किन सावधानियों को अपनाया जाए तथा मरीजों को उपचार के प्रति कैसे प्रेरित किया जाए।
माइक्रोस्कोपिक और NAAT जांच की दी गई जानकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम में टीबी रोग विशेषज्ञ रितेश कुमार सिंह एवं उनकी टीम ने युवाओं को टीबी की जांच की विभिन्न प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी। युवाओं को माइक्रोस्कोपिक जांच तथा NAAT विधि के संबंध में व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई, जिससे वे ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के संदिग्ध मरीजों को सही समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें। विशेषज्ञों ने युवाओं को बताया कि टीबी पूरी तरह उपचार योग्य बीमारी है। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार पूरा उपचार लेने से मरीज स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने यह भी समझाया कि टीबी के लक्षण दिखाई देने पर बीमारी को छिपाने या इलाज में देरी करने के बजाय तत्काल जांच कराना बेहद जरूरी है।
पोषण, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी जोर
डीपीटीसी समन्वयक शिशिर कांत ने प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को टीबी उन्मूलन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के साथ-साथ पोषण, स्वच्छता और उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को बताया कि टीबी के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से ही अभियान को सफल बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में मौजूद युवाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में घर-घर और समुदाय स्तर पर लोगों को जागरूक करने, टीबी के लक्षणों की जानकारी देने तथा संभावित मरीजों को समय से जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने की जिम्मेदारी के प्रति भी जागरूक किया गया।गांवों में जागरूकता की अलख जगाएंगे माय भारत वालंटियर्स अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित किए जा रहे ये युवा आने वाले दिनों में इचौलिया, ज्योरी और नियामतपुर समेत अपने आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी जागरूकता अभियान चलाएंगे। वालंटियर्स लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव, जांच, उपचार और पोषण संबंधी जानकारी देंगे तथा बीमारी के संदिग्ध मामलों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का प्रयास करेंगे।
अभियान का उद्देश्य ग्रामीण समुदाय में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को यह संदेश देना है कि समय पर पहचान और पूरा उपचार ही टीबी से मुक्ति का सबसे प्रभावी रास्ता है। युवाओं की भागीदारी से मजबूत होगा टीबी उन्मूलन अभियान कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी से स्वास्थ्य जागरूकता अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाया जा सकता है। माय भारत वालंटियर्स को अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए उन्हें समाज में सकारात्मक स्वास्थ्य संदेश पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।कार्यक्रम में राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक मसौली राम रूप वर्मा, युवा मंडल अध्यक्ष अरुण वर्मा, राष्ट्रीय युवा स्वयंसेविका शीतांसी, राष्ट्रीय युवा स्वयंसेविका माया देवी, राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक अनुज कुमार, आकृति राजवंशी, आंशिक राज, नईमा बानो सहित माय भारत के लगभग 20 वालंटियर्स मौजूद रहे।कार्यक्रम के दौरान युवाओं ने टीबी मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत करते हुए ग्रामीण समुदाय में जागरूकता फैलाने और संदिग्ध मरीजों को समय पर जांच एवं उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग करने का संकल्प लिया। स्वास्थ्य विभाग और युवाओं की संयुक्त भागीदारी से चल रहा यह अभियान बाराबंकी जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।



