नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : उप्र चारा विकास नीति 2024-29 के अन्तर्गत जनपद में किसानों को हरे चारे के उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नेपियर घास योजना के अंतर्गत जिले के 15 किसानों का चयन किया गया है। योजना के माध्यम से पशुओं के लिए वर्षभर पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध कराने के साथ किसानों की चारा लागत कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
योजना के तहत प्रत्येक चयनित किसान को 6,000 नेपियर रूट्स उपलब्ध कराए जाएंगे। किसान इनका रोपण करीब 0.2 हेक्टेयर भूमि में करेंगे। नेपियर घास की खासियत यह है कि एक बार रोपण के बाद यह करीब पांच वर्ष या उससे अधिक समय तक हरे चारे का उत्पादन करती है। इसके लिए हर वर्ष दोबारा रोपण करने की जरूरत नहीं पड़ती।
इस संबंध में 25 अगस्त को मुख्य विकास अधिकारी, गाजियाबाद की अध्यक्षता में जूम के माध्यम से चयनित किसानों के साथ बैठक आयोजित की गई। बैठक में चयनित लाभार्थियों के अलावा संबंधित पशु चिकित्सा अधिकारी, उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, उप निदेशक कृषि तथा पीडी मनरेगा ने भाग लिया। किसानों को नेपियर रूट्स लगाने से पहले खेत की जुताई, समतलीकरण और सिंचाई की व्यवस्था समय से पूरी करने के निर्देश दिए गए।
खेत की तैयारी के लिए प्रत्येक लाभार्थी को डीबीटी के माध्यम से 2,000 रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। वहीं, नेपियर रूट्स लगाने के बाद खाद एवं सिंचाई संबंधी आवश्यकताओं के लिए भी प्रति किसान 2,000 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में उपलब्ध कराई जाएगी।
योजना के लिए फफराना गांव से सतवीर सिंह व विकास, सारा से नीरज त्यागी, यूसुफपुर से सीमा, शाहजहांपुर से अजय कुमार राठी, कंवरपाल व सहंसर पाल, ललितपुर से वीरेंद्र, अलीपुर से नरेश, पुथरी से योगेंद्र सिंह, भोजपुरियान से सुनील, बड़का आरिफपुर से विनोद कुमार, जावली से मुकेश, औरंगाबाद से बिजेंद्र सिंह तथा खुर्रमपुर से संजीव कुमार का चयन किया गया है।
योजना की निरंतरता बनाए रखने के लिए अगले वर्ष चयनित किसानों से उत्पादित नेपियर रूट्स की दोगुनी मात्रा प्राप्त कर नए लाभार्थियों को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे भविष्य में अधिक किसानों और पशुपालकों को योजना से जोड़ने में मदद मिलेगी।
अधिकारियों के अनुसार नेपियर घास के उत्पादन से पशुओं को नियमित रूप से संतुलित एवं पौष्टिक हरा चारा मिल सकेगा। इससे पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन में सुधार के साथ किसानों के चारे पर होने वाले खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी ने चयनित किसानों से खेत की तैयारी समय पर पूरी कर योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की है।

