गोड्डा

होमगार्ड मुख्यालय की दोहरी नीति! पदाधिकारियों की मनमानी पर सवाल

गलत कार्यों के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला जवान को ड्यूटी से वंचित कर थमाया गया स्पष्टीकरण

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
गोड्डा। झारखंड गृह रक्षा वाहिनी में पदाधिकारियों की कथित मनमानी, कर्तव्य आवंटन में रोस्टर की अनदेखी तथा शिकायत करने वाले जवानों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में प्रदेश संरक्षक मनोज कुमार कुशवाहा व प्रदेश महासचिव राजीव तिवारी ने बताया कि एक ओर कथित रूप से अवैध राशि लेते हुए वीडियो वायरल होने वाली महिला होमगार्ड जवान को रोस्टर के विपरीत ड्यूटी आवंटित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, दूसरी ओर एक पदाधिकारी के कथित अभद्र व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने वाली महिला होमगार्ड जवान संचरिया कुमारी को ड्यूटी आवंटित करने के बजाय स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण ने होमगार्ड मुख्यालय की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सितंबर माह में रांची के बूटी मोड़ चौक पर यातायात ड्यूटी में तैनात गोड्डा जिला की महिला होमगार्ड जवान पूजा कुमारी का एक टेंपो चालक से कथित रूप से अवैध राशि लेते हुए वीडियो वायरल हुआ था। इस मामले में यातायात पुलिस अधीक्षक ने कार्रवाई करते हुए पूजा कुमारी को यातायात ड्यूटी से हटाने तथा उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद उन्हें उनके गृह जिला वापस भेज दिया गया। लेकिन इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस महिला होमगार्ड जवान के विरुद्ध यातायात पुलिस अधीक्षक ने अनुशासनिक कार्रवाई करने की बात कही थी, उसे कंपनी कमांडर निरल केरकेट्टा द्वारा रोस्टर के विरुद्ध जाकर धनबाद जिला के लिए कर्तव्य आवंटित कर दिया गया। यदि संबंधित जवान के विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही थी, तो रोस्टर के विपरीत कर्तव्य आवंटित करने का आधार क्या था? क्या विभाग में कर्तव्य वितरण के लिए निर्धारित नियम सभी पर समान रूप से लागू होते हैं? दूसरी ओर, गोड्डा जिला की महिला होमगार्ड जवान संचरिया कुमारी ने यातायात ड्यूटी से महिला जवानों को हटाए जाने के मामले में कंपनी कमांडर निरल केरकेट्टा से फोन पर बातचीत करने का प्रयास किया था। आरोप है कि इस दौरान कंपनी कमांडर ने उनसे अभद्र व्यवहार करते हुए कहा, “तुम्हें चर्बी ज्यादा हो गया है, आओ जिला तुम्हें बताते हैं की बात तक कही थी। इस घटना की जानकारी संचरिया कुमारी ने अपने पति एवं परिचितों को दी। मामले से संबंधित समाचार अखबारों में भी प्रकाशित हुआ। इसके बावजूद कंपनी कमांडर के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने के बजाय शिकायतकर्ता महिला होमगार्ड जवान को ही कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि संचरिया कुमारी को कर्तव्य आवंटित नहीं किया गया और उनके विरुद्ध प्रशासनिक कार्रवाई के लिए स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया। स्पष्टीकरण में कथित रूप से यह कहा गया कि उन्होंने नेताओं के बहकावे में आकर और नेता बनने की चाहत में कंपनी कमांडर पर गलत आरोप लगाए।
 जांच की जिम्मेदारी उसी अधिकारी को, जिसके अधीन कार्यरत हैं कंपनी कमांडर!
इस पूरे मामले में होमगार्ड मुख्यालय की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। मुख्यालय के द्वारा मामले की जांच गोड्डा जिला के जिला समादेष्टा जितेंद्र कुमार को सौंपे जाने की बात सामने आई है, जबकि कंपनी कमांडर निरल केरकेट्टा उन्हीं के अधीन कार्य करते है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस अधिकारी के अधीन संबंधित कंपनी कमांडर कार्यरत हैं, क्या उसी अधिकारी से शिकायत की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की अपेक्षा की जा सकती है?
जब कर्तव्य वितरण और रोस्टर के अनुपालन को लेकर भी संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हों, तो जांच की जिम्मेदारी ऐसे अधिकारी को सौंपना, जिनके अधीन संबंधित पदाधिकारी कार्य करते हैं, निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा करता है। इस मामले में स्वतंत्र जांच की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि शिकायतकर्ता को न्याय मिल सके और जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे।
इसके अतिरिक्त, यदि शिकायतकर्ता महिला होमगार्ड जवान के विरुद्ध आरोपों की जांच की जा रही है, तो कंपनी कमांडर के कथित व्यवहार तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों की भी समान गंभीरता से जांच होनी चाहिए। केवल शिकायतकर्ता के विरुद्ध कार्रवाई करना और संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय नहीं करना निष्पक्ष प्रशासन की भावना के अनुरूप नहीं है।
 होमगार्ड मुख्यालय की दोहरी नीति पर उठे सवाल
झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन का कहना है कि पूरे प्रकरण में कार्रवाई के दो अलग-अलग मानदंड दिखाई दे रहे हैं। एक महिला होमगार्ड जवान के मामले में, जिसे अवैध राशि लेते हुए पकड़ा गया उसे रोस्टर के विरुद्ध कर्तव्य आवंटित किए जाने की बात सामने आई है। वहीं, दूसरी महिला होमगार्ड जवान, जिसने अपने वरिष्ठ पदाधिकारी के कथित अभद्र व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाई, उसे कर्तव्य आवंटित करने के बजाय स्पष्टीकरण जारी कर दिया गया। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या होमगार्ड मुख्यालय में गलत कार्यों के विरुद्ध आवाज उठाने वाले जवानों को ही कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा? क्या पदाधिकारियों की कथित मनमानी पर सवाल उठाने वाले जवानों को ड्यूटी से वंचित कर दिया जाएगा?
एसोसिएशन ने कहा कि होमगार्ड मुख्यालय के समादेष्टा कैलाश करमाली से अपेक्षा की जाती है कि वे इस मामले में किसी भी प्रकार के पक्षपात से बचते हुए सभी संबंधित पक्षों के विरुद्ध समान मानदंड अपनाएं। विभाग में अनुशासन के नाम पर किसी जवान को प्रताड़ित नहीं किया जाना चाहिए और न ही किसी पदाधिकारी को उसके पद के कारण जवाबदेही से छूट मिलनी चाहिए।
 झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
महिला होमगार्ड जवान संचरिया कुमारी के साथ कंपनी कमांडर निरल केरकेट्टा द्वारा कथित अभद्र व्यवहार के मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच की जिम्मेदारी ऐसे स्वतंत्र अधिकारी को सौंपी जाए, जो निष्पक्ष हो।
संचरिया कुमारी के विरुद्ध जारी स्पष्टीकरण की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा उन्हें नियमानुसार कर्तव्य आवंटित करने पर विचार किया जाए।
पूजा कुमारी को धनबाद जिला के लिए कर्तव्य आवंटित किए जाने के मामले में रोस्टर, लागू नियमों और संबंधित आदेशों की जांच कराई जाए। कर्तव्य वितरण में रोस्टर का उल्लंघन किए जाने की शिकायतों की जांच कर जिम्मेदार पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
शिकायत करने वाले होमगार्ड जवानों के विरुद्ध प्रतिशोधात्मक कार्रवाई किए जाने की शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाए। सभी संबंधित मामलों में निष्पक्ष जांच के बाद, आरोप सिद्ध होने पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
झारखंड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन स्पष्ट करता है कि संगठन किसी भी जवान के गलत कार्य का समर्थन नहीं करता, लेकिन गलत कार्यों के विरुद्ध आवाज उठाने वाले जवानों के साथ अन्याय भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभाग में नियम, अनुशासन और जवाबदेही सभी के लिए समान होने चाहिए। पदाधिकारियों की कथित मनमानी पर रोक लगाना तथा जवानों को निष्पक्ष वातावरण उपलब्ध कराना विभागीय नेतृत्व की जिम्मेदारी है। एसोसिएशन होमगार्ड मुख्यालय एवं राज्य के संबंधित उच्चाधिकारियों से मांग करता है कि इस पूरे प्रकरण में दोहरे मापदंड अपनाने के आरोपों की गंभीरता से जांच की जाए, संचरिया कुमारी को निष्पक्ष जांच का अवसर मिले तथा किसी भी पक्ष के विरुद्ध कार्रवाई केवल तथ्यों, साक्ष्यों और विभागीय नियमों के आधार पर की जाए।
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