बागपत
“मुस्कान केवल चेहरे की खूबसूरती नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की पहचान है” – डॉ. मेहा सिंह

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
बड़ौत/बागपत : इंसान की मुस्कान उसके व्यक्तित्व की सबसे सुंदर पहचान होती है। जब किसी व्यक्ति के दांत स्वस्थ होते हैं, तो उसकी मुस्कान भी आत्मविश्वास से भरी होती है। लेकिन अक्सर लोग दांतों की सेहत को उतनी गंभीरता से नहीं लेते, जितनी लेनी चाहिए। इसी सोच को बदलने और लोगों को बेहतर दंत चिकित्सा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से युवा दंत चिकित्सक डॉ. मेहा सिंह (BDS, MDS) पिछले तीन वर्षों से बड़ौत क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं।
डॉ. मेहा सिंह इससे पहले आरोग्य डेंटल हॉस्पिटल, दिल्ली, धनवंतरी पॉली डेंटल क्लिनिक तथा रेखा डेंटल क्लिनिक, गाजियाबाद में अपनी विशेषज्ञ सेवाएं दे चुकी हैं। बड़े शहरों में काम करने के बाद भी उन्होंने छोटे शहर और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की सेवा करने का रास्ता चुना। वर्तमान में वे मिथन नर्सिंग होम (डॉ. दिलावर सिंह), छपरौली चुंगी बड़ौत में मरीजों का इलाज कर रही हैं और सैकड़ों लोगों को दांतों की समस्याओं से राहत दिला चुकी हैं।
इसी क्रम में संवाददाता सुरेंद्र मलानिया ने उनसे विशेष बातचीत की, जिसमें उन्होंने अपने अनुभव, सेवा भावना और दंत स्वास्थ्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की।
प्रश्न: डॉक्टर बनने का सपना कब और कैसे शुरू हुआ?
डॉ. मेहा सिंह:
बचपन से ही मेरा सपना था कि मैं ऐसा काम करूं जिससे लोगों के दर्द को कम कर सकूं। जब मैंने देखा कि कई लोग दांतों के दर्द से बहुत परेशान रहते हैं और समय पर इलाज न मिलने के कारण बड़ी समस्या झेलते हैं, तब मैंने तय किया कि दंत चिकित्सा के क्षेत्र में जाकर लोगों की मदद करूंगी। BDS और MDS की पढ़ाई पूरी करने के बाद जब मैंने मरीजों का इलाज शुरू किया, तो यह महसूस हुआ कि किसी मरीज के चेहरे पर दर्द से राहत मिलने के बाद जो मुस्कान आती है, वही मेरे लिए सबसे बड़ी संतुष्टि है।
प्रश्न: दिल्ली और गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में काम करने के बाद बड़ौत जैसे कस्बे को चुनने की प्रेरणा क्या रही?
डॉ. मेहा सिंह:
बड़े शहरों में काम करते हुए मुझे आधुनिक दंत चिकित्सा का अच्छा अनुभव मिला। लेकिन मैंने यह भी देखा कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में लोग दांतों की समस्याओं के लिए अक्सर बड़े शहरों पर निर्भर रहते हैं। कई बार दूरी, समय और आर्थिक कारणों से लोग इलाज ही नहीं करवा पाते। यही सोचकर मैंने तय किया कि जहां जरूरत ज्यादा है, वहीं सेवा देना ज्यादा जरूरी है। इसलिए पिछले तीन वर्षों से बड़ौत में मिथन नर्सिंग होम में मरीजों का इलाज कर रही हूं।
प्रश्न: यहां आने वाले मरीजों में सबसे ज्यादा किस प्रकार की समस्याएं देखने को मिलती हैं?
डॉ. मेहा सिंह:
यहां ज्यादातर मरीज दांतों में कीड़ा लगना, मसूड़ों से खून आना, दांतों में तेज दर्द और दांत टूटने जैसी समस्याओं के साथ आते हैं। कई लोग लंबे समय तक दर्द सहते रहते हैं और जब समस्या बहुत बढ़ जाती है तभी डॉक्टर के पास आते हैं। अगर समय रहते इलाज कराया जाए तो बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
प्रश्न: दांतों की सही देखभाल के लिए लोगों को क्या करना चाहिए?
डॉ. मेहा सिंह:
दांतों की देखभाल बहुत सरल है, बस थोड़ी-सी जागरूकता जरूरी है। दिन में दो बार ब्रश करना, खाने के बाद मुंह साफ करना, ज्यादा मीठा खाने से बचना और हर छह महीने में एक बार दांतों की जांच करवाना बेहद जरूरी है। छोटी-छोटी आदतें ही बड़े रोगों को रोक सकती हैं।
प्रश्न: आधुनिक दंत चिकित्सा में क्या बदलाव आए हैं?
डॉ. मेहा सिंह:
आज दंत चिकित्सा पहले से काफी आधुनिक हो चुकी है। अब रूट कैनाल, दांतों की कैप, ब्रिज, इम्प्लांट और कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री जैसी सुविधाओं से मरीजों को दर्द रहित और बेहतर इलाज मिल रहा है। कई बार लोग सोचते हैं कि दांत निकलवाना ही आखिरी विकल्प है, जबकि आज तकनीक की मदद से दांतों को बचाया भी जा सकता है।
प्रश्न: बड़ौत के लोगों के लिए आपका संदेश क्या है?
डॉ. मेहा सिंह:
मैं यही कहना चाहूंगी कि दांत हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगर दांत स्वस्थ होंगे तो खाना सही से खा पाएंगे और शरीर भी स्वस्थ रहेगा। इसलिए दांतों के दर्द को कभी हल्के में न लें और समय पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।
इस अवसर पर संवाददाता सुरेंद्र मलानिया ने कहा कि बड़ौत और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता हमेशा महसूस की जाती रही है। ऐसे में जब कोई विशेषज्ञ डॉक्टर बड़े शहरों को छोड़कर छोटे शहर में लोगों की सेवा करने का निर्णय लेते हैं, तो यह समाज के लिए बहुत सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम होता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. मेहा सिंह जैसे समर्पित चिकित्सक न केवल मरीजों का इलाज कर रहे हैं, बल्कि लोगों को दांतों की सेहत के प्रति जागरूक भी बना रहे हैं। इससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं अपने ही शहर में मिल पा रही हैं, जो निश्चित रूप से सराहनीय है।
बातचीत के अंत में डॉ. मेहा सिंह ने कहा कि उनके लिए हर मरीज केवल एक केस नहीं बल्कि एक इंसान होता है, जिसकी मुस्कान लौटाना ही उनके पेशे का असली उद्देश्य है।



