बेतुल

बैतूल के खेतों में सियासी मच रहा सियासी बवाल

एक दिन पहले कुकरू में  CM  ने किसान के खेत मे चलाया था हल ,जिसके  बाद आज  जीतू पटवारी ने भी हल पकड़कर बटोरी सुर्खियां

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 
 बैतूल जिले का किसान आज भी खाद, बीज, बारिश, कर्ज और फसल के दाम को लेकर परेशान है, लेकिन नेताओं के लिए उसके खेत सियासी स्टूडियो बन गए हैं। खेतों में पसीना बहाने वाला किसान वहीं खड़ा है, जबकि नेता कैमरों के सामने हल पकड़कर खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की होड़ में जुटे हैं।
एक दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कुकरू पहुंचे। खेत में हल चलाया, बोवनी की, कैमरे चमके और प्रचार का दौर शुरू हो गया। 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी भी बैतूल पहुंच गए। उन्होंने भी खेत में हल पकड़कर वही सियासी पटकथा दोहरा दी। फर्क सिर्फ इतना था कि किरदार बदल गया, लेकिन मंच, कैमरे और मकसद वही रहे।
विडंबना यह है कि जिन किसानों के नाम पर यह पूरा सियासी तमाशा हो रहा है, उनकी असली समस्याओं पर न सत्ता के पास जवाब है और न विपक्ष के पास ठोस रोडमैप। खेत में कुछ मिनट हल चलाकर किसानों का दर्द समझने का दावा करना, उस किसान की मेहनत का मजाक उड़ाने जैसा है, जो सालभर धूप, बारिश और कर्ज के बीच अपनी जिंदगी खपा देता है। बैतूल के खेत अब खेती से ज्यादा राजनीति की प्रयोगशाला बनते जा रहे हैं। यहां फसल से ज्यादा फोटो और समाधान से ज्यादा बयान उगाए जा रहे हैं। किसान को राहत नहीं, सिर्फ आश्वासन मिल रहा है और नेता हर सीजन में नया राजनीतिक अभिनय लेकर मैदान में उतर रहे हैं।
जब तक खेतों में कैमरों की जगह किसानों की समस्याएं केंद्र में नहीं आएंगी, तब तक हल चलाने की यह कवायद सिर्फ सियासी नौटंकी और जनता की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश ही मानी जाएगी।
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