बालाघाट

कारंजा में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने किया स्मृति भवन व देवरस नेत्रालय का लोकार्पण

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में हुए शामिल, सेवा और सामाजिक दायित्व पर दिया जोर

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बालाघाट/लांजी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत मंगलवार को एक दिवसीय प्रवास पर बालाघाट जिले के लांजी विकासखंड के ग्राम कारंजा पहुंचे। यहां उन्होंने संघ के तृतीय सरसंघचालक बालासाहेब देवरस एवं वरिष्ठ प्रचारक भाऊराव देवरस की स्मृति में निर्मित स्मृति भवन तथा माधव नेत्रालय द्वारा संचालित बालासाहेब देवरस नेत्रालय का लोकार्पण किया। लोकार्पण कार्यक्रम दोपहर करीब 2.30 बजे आयोजित किया गया।

देवरस बंधुओं की स्मृति में स्मृति भवन

कारंजा बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस से जुड़ा गांव है। दोनों की स्मृतियों और उनके सामाजिक योगदान को भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से स्मृति भवन का निर्माण किया गया है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. भागवत ने देवरस बंधुओं के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।

ग्रामीण क्षेत्र में नेत्र चिकित्सा सुविधा का उद्देश्य

माधव नेत्रालय द्वारा संचालित बालासाहेब देवरस नेत्रालय के माध्यम से लांजी, किरनापुर सहित आसपास के ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों के लोगों को नेत्र जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराने का उद्देश्य बताया गया है। इससे क्षेत्र के लोगों को आंखों से संबंधित उपचार के लिए दूरस्थ शहरों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

दत्त मंदिर में की पूजा-अर्चना

कारंजा प्रवास के दौरान डॉ. मोहन भागवत ने दत्त मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की। इसके अलावा उन्होंने संघ के 100 वर्ष के इतिहास पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में संघ की स्थापना से लेकर वर्तमान समय तक की संगठनात्मक यात्रा, सेवा गतिविधियों और सामाजिक कार्यों से संबंधित सामग्री प्रदर्शित की गई।

सेवा कार्यों पर दिया जोर

मंचीय संबोधन में डॉ. मोहन भागवत ने बालासाहेब देवरस और भाऊराव देवरस के जीवन तथा उनके राष्ट्र एवं समाज के प्रति योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जहां प्रत्यक्ष कार्य हो रहा हो, वहां केवल बोलने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि कार्य को महत्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने संघ के सेवा कार्यों और समाज के प्रति जिम्मेदारी पर भी विचार व्यक्त किए।

भागवत ने ‘सेवा’ और ‘सर्विस’ के बीच अंतर को समझाते हुए सेवा को निस्वार्थ भाव और समाज के प्रति अपनत्व से जोड़कर देखने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज के लिए बिना स्वार्थ कार्य करने की भावना व्यापक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकती है।

शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में सहभागिता

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में कारंजा में भी कार्यक्रम आयोजित हुआ। डॉ. भागवत के प्रवास के दौरान संघ के इतिहास, सेवा गतिविधियों और सामाजिक दायित्व से जुड़े विषय प्रमुखता से सामने आए।

संघ प्रमुख के आगमन को लेकर कारंजा में सुरक्षा एवं अन्य व्यवस्थाएं की गई थीं। कार्यक्रम में संघ पदाधिकारियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति रही।

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