मुरादाबाद
आरटीआई कार्यकर्ता कासिम सैफी की हत्या के मामले में कोर्ट ने विकास चौधरी को सुनाई उम्रकैद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। आरटीआई कार्यकर्ता कासिम सैफी की हत्या के मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला जज (एफटीएससी कोर्ट) की अदालत ने इस चर्चित हत्याकांड के मुख्य आरोपी शूटर विकास चौधरी को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 20 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में अन्य तीन आरोपियों पूर्व प्रधान हारुन सैफी, समाजवादी पार्टी की पूर्व नेत्री अलका दुबे और कुलदीप को बरी कर दिया।
हत्या के पीछे था आरटीआई से खुलासा करने का खतरा
पुलिस जांच के अनुसार, कासिम सैफी एक सक्रिय आरटीआई कार्यकर्ता था और उसने कई मामलों में पंचायत व सरकारी योजनाओं की गड़बड़ियों को उजागर किया था। बताया जाता है कि उसने कई लोगों की जमीन से जुड़ी फर्जीवाड़े की शिकायतें भी उजागर की थीं, जिससे कुछ प्रभावशाली लोग नाराज थे।
शव शूटर के गांव से बरामद
कासिम सैफी की हत्या के बाद उनका शव विकास चौधरी के गांव से बरामद हुआ था, जिससे इस पूरे मामले में विकास की भूमिका स्पष्ट हुई। जांच में यह भी सामने आया कि हत्या की साजिश पूर्व में रची गई थी और योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया।
पुलिस ने इन लोगों को बनाया था आरोपी
हत्या के मामले में पुलिस ने शूटर विकास चौधरी के अलावा पूर्व प्रधान हारुन सैफी, अलका दुबे और कुलदीप को भी आरोपी बनाया था। इन पर हत्या की साजिश रचने और मदद करने के आरोप थे। हालांकि, मुकदमे की कार्यवाही के दौरान इन तीनों के खिलाफ ठोस साक्ष्य पेश नहीं हो पाए।
अभियोजन पक्ष ने कहा न्याय की जीत
अभियोजन पक्ष के वकील ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि भले ही तीन आरोपी साक्ष्य के अभाव में छूट गए हों, लेकिन मुख्य शूटर को सजा मिलना न्याय की जीत है। उन्होंने कहा कि यह फैसला आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा और भरोसा देगा कि कानून उनके साथ है।
पीड़ित परिवार ने जताई नाराजगी
हालांकि, कासिम सैफी के परिजनों ने फैसले पर आंशिक असंतोष जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि साजिश रचने वालों को भी सजा मिलेगी। परिवार का कहना है कि वे ऊपरी अदालत में अपील करेंगे ताकि सभी दोषियों को सजा दिलाई जा सके।



