ललितपुर

भारत की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले जयन्ती मनाने का निर्णय

तीन जनवरी को बुन्देलखण्ड महिला विकास सेवा समिति करेगी आयोजन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। बुन्देलखण्ड विकास सेवा समिति की एक आवश्यक बैठक जिला कार्यालय पर अध्यक्ष गुलाबबाई सेन की अध्यक्षता में सम्पन्न हुयी। बैठक में आगामी 3 जनवरी को भारत की प्रथम महिला शिक्षिका व समाजसेविका सावित्रीबाई फुले की जयन्ती मनाने पर विचार-विमर्श किया गया। समिति सचिव गीता सेन ने कहा कि सावित्री बाई फुले को देश की पहली अध्यापिका के रूप में जाना जाता है। सावित्री बाई फुले एक समाज सुधारक अध्यापिका, लेखिका और कवियित्री थीं। आधी आबादी के हक, सम्मान की लड़ाई जीवन पर्यन्त लडऩे वाली सावित्री बाई फुले के नाम से हर कोई परिचित होगा, पर क्या आप जानते हैं कि उन्होंने अपने जीवन के आखिरी समय को भी मानव जाति की सेवा में लगा दिया। इतना ही नहीं उनके प्रयासों की वजह से संभव हो पाया कि स्त्रियों को शिक्षा का समान अधिकार प्राप्त है। समिति अध्यक्ष गुलाबबाई सेन ने कहा कि महान समाज सुधारक सावित्री बाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 में महाराष्ट्र के सतारा जिले के नयागांव में हुआ था। इनके पिता का नाम खन्दोजी नैवेसे था जो कि एक किसान थे। इनकी माताजी का नाम लक्ष्मीबाई था। उन्होंने अपना पहला स्कूल लड़कियों के लिए वर्ष 1848 में पुणे में खोला था। शिक्षिका श्रद्धा भारती ने कहा कि सामाजिक एकता, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाली महान विभूति सावित्री बाई फुले ने भारत में स्त्री शिक्षा का सूत्रपात करके एक मिशाल कायम की। गीता वर्मा ने कहा कि नारी का वर्तमान जीवन शिक्षित, सभ्य और पुरुष के कंधे से कंधा मिलाकर चलने का स्वरूप सावित्रीबाई फुले के अनवरत संघर्षों व प्रयासों का ही परिणाम है। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सामाजिक चेतना के सहासों को समर्पित कर दिया है। भारत की महान नारी सावित्री बाई फुले के जीवन के अनछुए पहलुओं से उनके कार्य परिचित कराते हैं। इनके अलावा कृष्णा सेन, सुशीला राजपूत, रेखा चढ़ार, नीतू कुशवाहा आदि ने भी बैठक में संबोधित किया। इस दौरान समिति अध्यक्ष ने कहा कि कार्यक्रम में अधिक से अधिक महिलाओं की भागीदारी हो। प्रचार-प्रसार कर उन तक सूचना पहुंचायी जाये। बैठक में वन्दना कुशवाहा, नीलम कुशवाहा, गुलाबबाई सेन, गीता वर्मा, रेखा वर्मा, राजेश्वरी जायसवाल, सुशीला राजपूत, कौशल्या यादव, शान्तिबाई सेन, रामदेवी सेन, डोली सेन, गुडडी सेन, रेनू याज्ञिक, शिखा याज्ञिक, सरोज सेन, रेखा सेन, भारती सेन, नीतू सेन, राजकुमारी सेन, रामदेवी कुश्चवाहा, रानी कुशवाहा, मोहिनी कुशवाहा, क्रान्ति विश्वकर्मा, गुडडी नापित, रोशनी कुशवाहा, कमलेश नामदेव, सुशीला यादव आदि मौजूद रहीं। संचालन समिति सचिव गीता सेन ने व आभार प्रियंका सेन ने जताया।
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